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कर्म हम ऐसा करें…

प्रतिदिन नयी उमंग हो, मन में उठी तरंग हो,
कर्म हम ऐसा करें, देख दुनिया दंग हो।

पथ कांटे हों कि शूल हों, भले परिस्थिति प्रतिकूल हो,
अंजाम से डरें नहीं, भूल कर न भूल हो।
हर काम करने का यहाँ, अपना निराला ढंग हो,
कर्म हम ऐसा करें,..।

उन्नति की राह पर, बढ़े चलो, बढ़े चलो,
हो समक्ष हिमशिखर, चढ़े चलो, चढ़े चलो।
चलो आसमां को हम छुएँ, जैसे उड़ती पतंग हो,
कर्म हम ऐसा करें, ..।

तुम्हारा प्रण डिगे नहीं, ईमान कभी बिके नहीं,
हासिल हों नित नए मुकाम, सिर कभी झुके नहीं।
कर्म ही काशी-मथुरा, कर्म हाजी मलंग हो,
कर्म हम ऐसा करें, .।

डॉ. शशिकला पटेल, असिस्‍टेंट प्रोफेसर आर. आर. एज्‍युकेशनल ट्रस्‍ट बी. एड. कॉलेज (मुलुंड पूर्व ), मुंबई

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