प्रेम का वादा, पीड़ा का सच

नारी की संवेदनाएँ बहुत गहरी और जटिल होती हैं। प्रेम से पीड़ा तक का सफ़र एक ऐसा अनुभव है, जो उसके जीवन को बहुत गहराई से प्रभावित करता है. प्रेम, ममता और करुणा की प्रतिमूर्ति कही जाने वाली स्त्री को जब प्रेम में कई तरह से छला जाता है  कभी पति बनकर तो कभी प्रेमी बनकर तो यह प्रेम से पीड़ा तक का भयावह सफ़र उसे गहराई से तोड़ देता है.

 यह ऐसा अनुभव है, जो नारी की संवेदनाओं को बहुत गहराई तक प्रभावित करता है। प्रेम में धोखा, अपमान या परित्याग जैसी घटनाएँ नारी की भावनाओं को अंतःआहत करती हैं और उसे पीड़ा में डूबो देती हैं.

कोमल हृदया नारी की संवेदनाएँ प्रेम में अत्यंत कोमल और संवेदनशील होती हैं। जब वह प्रेम में होती है, तो उसकी भावनाएँ आकाश की नई ऊँचाइयों को छू लेती हैं, लेकिन जब प्रेम में धोखा या अपमान मिलता है, तो उसकी भावनाएँ गहराई से आहत होती हैं।कई रूपों में उसे मर्मान्तक पीड़ा झेलनी पड़ती है. ऐसी मानसिक पीड़ा, जो उसके मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करती है.

आत्म-सम्मान धज्जी-धज्जी हो जाता है, जो कभी-कभी तो उसे जीवन-लीला समाप्त करने पर मजबूर कर देता है.परंतु आत्मविश्वास से भरी नारी, पीड़ा और घृणा से छटपटाकर उठ खड़ी होती है और अपने जीवन को एक नई दिशा, नई दृष्टि देती है. वह टूटती है, जूझती है, पर खुद को बिखरने से बचा लेती है. अपने ही आँसुओं से खुद को गूँथती है और गढ़ लेती है अपनी निज प्रतिमा, जिसमें प्राण फूँकने के लिए किसी पुरुष की दरकार नहीं होती। फिर वह जुड़ जाती है नई परिस्थितियों और नई चुनौतियों से.

माधुरी द्विवेदी, प्रसिद्ध लेखिका, कानपुर

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