
डॉ ऋषिका वर्मा, गढ़वाल उत्तराखंड
चलो नई राहों पर चलें, नया सफर बनाएँ,
बीते पलों की परछाइयों को अब पीछे छोड़ आएँ।
सूरज फिर से चमक रहा, नई रोशनी संग लाए,
मन में भर लें आश की किरणें, सपनों को अपनाएँ।
जो कल खोया, वो सपना था, जो आज मिला, वो अपना है,
नई उम्मीदों की बाहों में, एक नया कल बसाना है।
हर मोड़ पर एक सीख मिले, हर पल कुछ सिखलाए,
गुज़रे कल से सीख लेकर, अब आगे कदम बढ़ाएँ।
संघर्षों से मत घबराना, हर कठिनाई हल होगी,
इच्छाशक्ति जब संग चले, तो दुनिया भी सरल होगी।
नया सफर, नया उजाला, नई उमंगें, नई बात,
हौसले से लिखें कहानी, आज से है नई शुरुआत।
