
रीता मिश्रा तिवारी,भागलपुर
सुनो दोस्त..
चलो हम मिट्टी मिट्टी खेलते हैं
मूर्ति बनाते हैं
एक तुम एक हम
तुम मेरे और हम तेरे जैसा
तेरी एक आँख मेरी और मेरा एक कान तेरा
बन गये न हम दोनों
एक से..!
सुनो दोस्त..
चलो हम थोड़ा दिमाग बांटते हैं
पर हम दोनों का दिल एक है
दोस्ती का पलड़ा भारी हो
टूटना नहीं चाहिए
खुशियों को गुणा करके
दुखों का भाग देकर बुराइयों को घटा देते हैं
और गुणों को जोड़ देते हैं..!
सुनो दोस्त..
दोस्ती में प्रेम को जोड़ते हैं
घटाव तो बिल्कुल भी नहीं
रिश्तों में जोड़ घटाव होता है
हमें जिंदगी भर की दोस्ती
और प्रेम चाहिए
हम रोए तो हँसाये रूठे तो मनाए
आँखों की नमी चुराकर
होठों पर मुस्कान ले आए
जाती,धर्म,संस्कृति के दायरे से बाहर
हमें किसी बात से कोई सरोकार नहीं
बस..
हर स्वार्थ से परे हमारी दोस्ती में
निश्चल प्रेम हो..!
