
मौसमी चंद्रा, पटना
दोस्त वो
जिसके सामने सही होने की मजबूरी न रहे।
जिससे बात करते हुए खुशामद का ख्याल न रहे।
जो तुम्हारी अनुपस्थिति को
तुम्हारे विरुद्ध बोले जाने का अवसर न बनने दे।
जो पीठ पीछे भी तुम्हारे सम्मान का प्रहरी बना रहे।
दोस्त वो
जो तुम्हारी तकलीफ़ों के हर मौसम में साथ रहे।
जिसे बरसों बाद भी मिलो तो
औपचारिकताएं बीच में आने से इनकार कर दे।
और दोस्त वो जो तुम्हारे भीतर
इंसान की बची हुई आखिरी परत बचाए रखे।
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“तेरे बिना ज़िंदगी से कोई शिकवा तो नहीं…”

थैंक यू सुरेश जी 🌼