सच्चा दोस्त : एक अनमोल तोहफ़ा
यह कविता सिर्फ़ शब्दों का मेल नहीं है, बल्कि मेरे अपने जीवन के एक बेहद खूबसूरत सच का हिस्सा है। मेरी ज़िंदगी के हर उतार-चढ़ाव में, मेरी हर छोटी-बड़ी कामयाबी में और ख़ासकर मेरे सबसे कठिन समय में, मेरे सच्चे दोस्त ने हमेशा मेरा हौसला बढ़ाया है। इस निस्वार्थ परवाह और साथ के लिए शब्दों में शुक्रिया कहना मुमकिन नहीं, पर यह कविता मेरे उसी अज़ीज़ दोस्त को एक छोटा-सा समर्पण है।
