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तेरे खत

पुराने प्रेम पत्र और भावनात्मक यादों को दर्शाती ‘तेरे खत’ हिंदी कविता की यथार्थवादी छवि।

ज्योत्सना चोपड़ा, अहमदाबाद

तेरे खत का अफसाना, वो बीता हँसी ज़माना,
है तीन दशक पुराना, नहीं है आज का फसाना।
विवाह के चंद दिनों बाद तुम्हारा दूर चले जाना,
विवशता व्यवसाय की, समझ मेरा मौन हो जाना।

तेरे खत मिलते ही मेरा जज़्बातों में बह जाना,
विरह-व्याकुल अश्कों का कठिन था रोक पाना।
तुम्हारी याद में प्रेमाश्रुओं का खत पर गिर जाना,
लगा खत को गले से, स्वप्नलोक में मेरा चले जाना।

सुबह होते ही तेरे खत का मन में उत्साह भर देना,
खत की छुअन में ही तेरे पास होने का अहसास होना।
फिर खत की खुमारी में मेरा व्यवसाय में लग जाना,
अकेलेपन में देख खत, आँखें फिर से नम हो जाना।

तेरे खत, मेरी मोहब्बत के पैगाम का सुंदर नज़राना,
दिल को छू गया तुम्हारा हाल-ए-दिल इज़हार करना।
खत के हर लफ़्ज़ में छुपा था हमारे प्यार का तराना,
मधुर मिलन की आस बढ़ाता, तेरे खत का आ जाना।

बरसों से दिल में सहेज कर रखा है मैंने यह ख़ज़ाना,
नहीं भूलता आज भी विरह में बीता समय पुराना।
याद आता है दूर रहकर तुम्हारा अधिक प्यार जताना,
खूब अच्छा था खतों के आदान-प्रदान का ज़माना।

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