एक पाती तुम्हारे नाम…
कुछ रिश्तों को किसी नाम की जरूरत नहीं होती। वे विश्वास, अपनापन और इंतजार से पहचाने जाते हैं। “एक पाती तुम्हारे नाम” ऐसे ही आत्मीय प्रेम और विरह की भावनाओं को शब्द देती है।

कुछ रिश्तों को किसी नाम की जरूरत नहीं होती। वे विश्वास, अपनापन और इंतजार से पहचाने जाते हैं। “एक पाती तुम्हारे नाम” ऐसे ही आत्मीय प्रेम और विरह की भावनाओं को शब्द देती है।
क्या प्रेम केवल साथ रहने का नाम है, या किसी की खुशबू की तरह मन में हमेशा बने रहने का एहसास? ‘गुलमोहर और रजनीगंधा के नाम’ एक रूहानी और रोमांटिक पत्र है, जो प्रेम को रंगों, खुशबू और आत्मिक जुड़ाव के माध्यम से व्यक्त करता है।
जब मोबाइल और ई-मेल नहीं थे, तब खत ही रिश्तों की धड़कन हुआ करते थे। पोस्टकार्ड से लेकर लिफाफे तक, हर पत्र में सिर्फ़ खबर नहीं, पूरा जीवन लिखा होता था। यह कहानी उसी इंतज़ार, उस स्याही और उन भावनाओं की है, जो आज भी दिल को भिगो देती हैं।
तुम्हारे खतों का वह पुलिंदा, जिसे मैंने संदूक में संभाल रखा था, मेरे लिए समय की किताब बन गया है। हर खत अपनी कहानी कहता है कभी देर से उठने की डांट और चाय के ठंडे निशान याद दिलाते हैं, तो कभी तुम्हारी छुटकी की मुस्कान और टीचर की डांट में बचपन की मासूमियत झलकती है। कुछ खत चोट के निशानों, पहली तकरार की मिठास या पहला चुंबन याद दिलाते हैं।