आत्मगौरव

उगते सूरज की रोशनी में आत्मगौरव और राष्ट्रप्रेम के भाव के साथ आगे बढ़ते लोगों का प्रेरक दृश्य, देशभक्ति हिंदी कविता का प्रतीकात्मक चित्र।

भानुप्रकाश शर्मा, मुंबई

आत्मगौरव भाव लेकर,
देश आगे बढ़ चला है…!
पथ सदा हमने चुना वह,
विश्व का जिसमें भला है…!!

नित्य नूतन प्रेरणा ले,
बढ़ रहे कोटि चरण हैं…।
नर ही नारायण हमारा,
राष्ट्र को हम सब शरण हैं…।।

विश्व को हमसे है आशा,
सबसे पावन ये धरा है…!
पथ सदा हमने चुना वह,
विश्व का जिसमें भला है…!

विश्व को ही है समर्पित,
ज्ञान, कौशल, शौर्य सारा…।
मुश्किलों पर मात करने,
विश्व का हम ही सहारा…।।

जब हुए हम अग्रसर तब,
विश्व का संकट टला है…!
पथ सदा हमने चुना वह,
विश्व का जिसमें भला है…!!

जीत को हमने है चूमा,
खेल में और हर समर में…।
फसल खुशियों की उगाई,
खेत, नदियों और डगर में…।।

हर हाथ कौशल से सजा है,
पूजते हम हर कला हैं…!
पथ सदा हमने चुना वह,
विश्व का जिसमें भला है…!!

दुष्ट को हमने हराया,
चाल से और ढाल से भी…।
मातृभूमि को बचाने,
लड़ पड़े हम काल से भी…।।

हाथ शक्ति से सुसज्जित,
वीर-सा साहस पला है…!
पथ सदा हमने चुना वह,
विश्व का जिसमें भला है…!!

नारी गौरव, श्रम-प्रतिष्ठा,
भक्ति, मुक्ति, ज्ञान, दर्शन…!
सबकी रक्षा, न्याय सबको,
शक्ति का हम हैं सुदर्शन…!!

तिमिर, भय से या प्रलय से
क्या कभी सूरज ढला है…?
पथ सदा हमने चुना वह,
विश्व का जिसमें भला है…!!

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