स्वतंत्रता की रागिनी
स्वतंत्रता की रागिनी’ भारत की स्वतंत्रता, प्रकृति की सुंदरता और तिरंगे के गौरव का भावपूर्ण काव्य-गान है. कविता मातृभूमि के प्रति श्रद्धा और भारत की यश-कीर्ति को युगों तक जीवित रखने की भावना व्यक्त करती है.

स्वतंत्रता की रागिनी’ भारत की स्वतंत्रता, प्रकृति की सुंदरता और तिरंगे के गौरव का भावपूर्ण काव्य-गान है. कविता मातृभूमि के प्रति श्रद्धा और भारत की यश-कीर्ति को युगों तक जीवित रखने की भावना व्यक्त करती है.
पंद्रह अगस्त पर देशभक्ति के जश्न के बीच यह कविता एक जरूरी सवाल उठाती है—क्या केवल एक दिन तिरंगा लहराना ही देशभक्ति है? कविता स्वच्छता, एकता, भाईचारे और मातृभूमि के प्रति जिम्मेदारी को सच्ची देशभक्ति का आधार बताती है.
यह कविता उन वीर सपूतों को श्रद्धांजलि है जिन्होंने मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया. उनके शौर्य, त्याग और अमर बलिदान को समर्पित भावपूर्ण रचना.
वर्तमान सामाजिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रीय परिस्थितियों पर प्रश्न उठाती यह ओजपूर्ण हिंदी कविता भारत के भविष्य को लेकर कवयित्री की चिंता और भावनाओं को अभिव्यक्त करती है। कविता में भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और सामाजिक परिवर्तनों पर चिंतन करते हुए भगवान राम से प्रतीकात्मक संवाद के माध्यम से अनेक सवाल पूछे गए हैं। यह रचना पाठकों को आत्ममंथन और विचार के लिए प्रेरित करती है।
कारगिल विजय दिवस के अवसर पर माँ सरस्वती राष्ट्रीय काव्य मंच भारत एवं संस्था “एक प्रयास भारत” द्वारा आयोजित ऑनलाइन काव्य गोष्ठी में देशभर के प्रतिष्ठित कवियों और साहित्यकारों ने अपनी ओजस्वी एवं भावपूर्ण रचनाओं के माध्यम से कारगिल के अमर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की।
“देश की धरा” एक वैचारिक और संस्कृतनिष्ठ कविता है, जो भारत की सनातन चेतना, वैदिक परंपरा और मानवतावादी दृष्टि को शब्दों में उकेरती है।