Live Wire News literary portal with Gulmohar and Rajnigandha flowers

स्वतंत्रता की रागिनी

तिरंगे और भारत की प्राकृतिक सुंदरता को दर्शाती स्वतंत्रता दिवस की देशभक्ति कविता

सुप्रसन्ना

स्वतंत्रता की रागिनी
मधुर-मधुर रस घोल रही,
हिमगिरि से सागर तक
भारत-गाथा बोल रही।

स्वर्णिम भोर के संग-संग
नव आशा मुस्काती है,
तिरंगे की हर एक लहर
गौरव-गान सुनाती है।

खेतों में हरियाली गाती,
नदियाँ कल-कल गान करें,
नील गगन में उड़ते पंछी
मधुर स्वर में अभिनंदन करें।

जन-जन के उर में बसती
यह अनुपम अभिरामिनी,
युग-युग तक गूँजित रहे
स्वतंत्रता की रागिनी।

मातृभूमि के चरणों में
श्रद्धा के सुमन खिलें,
भारत की यश-कीर्ति के
दीप सदा अविरल जलें।

स्वतंत्रता की रागिनी
जय का मंगल गान करे,
विश्व-पटल पर भारत का
नित्य नवोदय मान करे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *