स्वतंत्रता की रागिनी
स्वतंत्रता की रागिनी’ भारत की स्वतंत्रता, प्रकृति की सुंदरता और तिरंगे के गौरव का भावपूर्ण काव्य-गान है. कविता मातृभूमि के प्रति श्रद्धा और भारत की यश-कीर्ति को युगों तक जीवित रखने की भावना व्यक्त करती है.

स्वतंत्रता की रागिनी’ भारत की स्वतंत्रता, प्रकृति की सुंदरता और तिरंगे के गौरव का भावपूर्ण काव्य-गान है. कविता मातृभूमि के प्रति श्रद्धा और भारत की यश-कीर्ति को युगों तक जीवित रखने की भावना व्यक्त करती है.
पंद्रह अगस्त पर देशभक्ति के जश्न के बीच यह कविता एक जरूरी सवाल उठाती है—क्या केवल एक दिन तिरंगा लहराना ही देशभक्ति है? कविता स्वच्छता, एकता, भाईचारे और मातृभूमि के प्रति जिम्मेदारी को सच्ची देशभक्ति का आधार बताती है.
आज़ादी के जश्न, तिरंगे और देशभक्ति के नारों के बीच यह रचना आम आदमी की रोजमर्रा की परेशानियों और सामाजिक विडंबनाओं का मार्मिक चित्र प्रस्तुत करती है.
यह कविता उन वीर सपूतों को श्रद्धांजलि है जिन्होंने मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया. उनके शौर्य, त्याग और अमर बलिदान को समर्पित भावपूर्ण रचना.