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सच्चा दोस्त : एक अनमोल तोहफ़ा

मुश्किल समय में एक-दूसरे का साथ देते दो सच्चे दोस्तों का भावुक और यथार्थवादी दृश्य।

डॉ. संगीता पांडेय

भीड़ की इस दुनिया में जो हाथ थाम ले,
बिना कहे जो दिल की हर बात जान ले।
चेहरे की झूठी मुस्कान को जो पल में पढ़ ले,
वो कोई और नहीं, एक सच्चा दोस्त होता है।

जब मुश्किलें घेर लें और रास्ते धुंधले हों,
जब अपने भी पीछे हटें और हौसले कम हों।
जो चुपके से आकर कहे, “मैं हूँ न तुम्हारे साथ।”
वो कोई और नहीं, एक सच्चा दोस्त होता है।

जब घने अंधेरों ने मुझे चारों ओर से घेरा था,
जब हिम्मत टूट रही थी और न दिखता सवेरा था।
जिसने हाथ बढ़ाकर मेरी गिरती उम्मीदों को संभाला,
मेरी ज़िंदगी के उस मुश्किल वक्त को पल में बदल डाला।
वो कोई और नहीं, एक सच्चा दोस्त होता है।

मेरी हर छोटी-बड़ी कामयाबी पर जो मुझसे ज़्यादा खुश होता है,
मुझे तकलीफ़ में देखकर जो चुपचाप मेरे साथ आकर खड़ा होता है।
जिसकी फ़िक्र में कोई शर्त नहीं, बस निस्वार्थ-सा प्यार है,
वो कोई और नहीं, मेरा वही यार है।

मसरूफ़ियत की इस दुनिया में जो मेरे लिए वक्त चुराता है,
हारने लगूँ जब भी, तो बढ़कर मेरा उत्साह बढ़ाता है।
जो हर कदम पर मेरी ताकत और मेरी ढाल बनता है,
वो कोई और नहीं, एक सच्चा दोस्त होता है।

न वो रूप देखता है, न वो पैसा देखता है,
वो तो बस दिल का साफ़ आईना देखता है।
गलती करने पर भी जो कभी डाँटे और रूठे नहीं,
वो कोई और नहीं, एक सच्चा दोस्त होता है।

मेरी खुशियों में भी जो अपनी खुशी ढूँढ़ लेता है,
मेरे आँसुओं को जो कभी गिरने नहीं देता है।
वक्त बदल जाए, पर जिसका साथ कभी न बदले,
वो कोई और नहीं, एक सच्चा दोस्त होता है।

किस्मत वाले होते हैं वो, जिन्हें यह वरदान मिलता है,
इस मतलबी दुनिया में कोई ऐसा इंसान मिलता है।
जो ज़िंदगी के हर सफर को खूबसूरत बना दे,
वो कोई और नहीं, एक सच्चा दोस्त होता है।

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