मुश्किल समय में एक-दूसरे का साथ देते दो सच्चे दोस्तों का भावुक और यथार्थवादी दृश्य।

सच्चा दोस्त : एक अनमोल तोहफ़ा

यह कविता सिर्फ़ शब्दों का मेल नहीं है, बल्कि मेरे अपने जीवन के एक बेहद खूबसूरत सच का हिस्सा है। मेरी ज़िंदगी के हर उतार-चढ़ाव में, मेरी हर छोटी-बड़ी कामयाबी में और ख़ासकर मेरे सबसे कठिन समय में, मेरे सच्चे दोस्त ने हमेशा मेरा हौसला बढ़ाया है। इस निस्वार्थ परवाह और साथ के लिए शब्दों में शुक्रिया कहना मुमकिन नहीं, पर यह कविता मेरे उसी अज़ीज़ दोस्त को एक छोटा-सा समर्पण है।

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दोस्ती कैसे करें

दोस्ती का साइंस: नए दोस्त बनाने के 5 आसान तरीके

मनोविज्ञान के अनुसार दोस्ती बनाना कोई कठिन कला नहीं, बल्कि एक समझी जा सकने वाली प्रक्रिया है. बार-बार मिलना, खुलकर बातचीत करना, पहल करना और रिश्तों को समय देना ये छोटे लेकिन असरदार कदम किसी भी व्यक्ति को मजबूत और लंबे समय तक चलने वाली दोस्ती बनाने में मदद कर सकते हैं.

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मैं तुमसे मिलना चाहती हूँ… बस एक बार

रक्षा उपाध्याय, प्रसिद्ध लेखिका, इंदौर आज अमर और सुहानी ने एक क़ैफे में मिलने का तय किया था…अमर आज किसी कारण से सुहानी के शहर आया हुआ था.अमर और सुहानी पहली बार मिलने वाले थे…..अमर ने सुहानी से कई बार मिलने की रिक्वेस्ट की थी. शायद वैसे ही कह दिया करता था, क्योंकि वो भी…

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जिंदगी और कट चाय

पल-पल बीतते जा रहे हैं, और जीवन का रस धीरे-धीरे खत्म होता जा रहा है। इसलिए बेकार की बातें छोड़कर मौजूदा समय का आनंद लेना चाहिए। मित्रों के साथ बिताए गए पल, उनकी हँसी, कभी-कभी उनके आँसुओं की चिंता, और साथ में पी गई चाय—ये सब छोटी-छोटी खुशियाँ जीवन को पूर्ण बनाती हैं। यह कविता समय की अनवरत गति, मित्रता, साधारण सुख और जीवन के क्षणों की क़ीमत का स्मरण कराती है।

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जो ठहर गए, वही असली कहानी हैं

सत्तर वर्ष की उम्र में जीवन ने सिखाया कि लोग आते-जाते रहते हैं, कुछ बसंत की तरह उजास और उम्मीदें लाते हैं, कुछ शीत की आँधी की तरह चले जाते हैं। युवावस्था में हर विदाई पीड़ादायक लगती थी, लेकिन समय और अनुभव ने यह समझाया कि जो लोग आपके लिए बने हैं, वे हमेशा लौटकर आते हैं। असली खुशी और जीवन की कहानी उन लोगों में है जो आपके साथ ठहरते हैं, आपकी आत्मा को समझते हैं और बिना किसी जोर-जबरदस्ती के आपके जीवन में बने रहते हैं।

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पिंक फ्रॉक

पिंकी की ज़िद नई पिंक फ्रॉक की थी, लेकिन जब उसने अपनी सहेली मुन्नी को फटे-पुराने कपड़ों में देखा तो उसका मन बदल गया। उसने अपनी सुंदर फ्रॉक मुन्नी को दे दी। उस पल उसे समझ आया कि असली खुशी पाने में नहीं, बाँटने में है।

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बगुलाभगत

तुमने मित्रता का हाथ बढ़ाया और मैंने उसे सच्चे मन से स्वीकार भी किया। यह अनुभव मुझे एक नई ख दे गया – कि हर नए मित्र को परखकर ही अपनाना चाहिए। तुम्हें यह भ्रम रहा कि तुम्हारी मित्रता मुझे जीवन भर अभिमान देगी, लेकिन धीरे-धीरे मैं समझने लगी कि मित्रता में स्वार्थ छिपा होता है और उसका सत्य अक्सर कटु होता है।
तुम्हारी खट्टी-मीठी बातें, दिखावे की आवभगत और गरिमामयी उपस्थिति मुझे किसी बगुला भगत से कम नहीं लगी। मेरी बेरंग जिंदगी में रंग भरने की तुम्हारी कोशिश झूठी थी, और प्रेम प्रसंगों की ठिठोली मेरी आस्था को भीतर ही भीतर जला रही थी। तुम्हारी झूठी तारीफें, बनावटी शानोशौकत और ऊँची-ऊँची बातें मेरी अस्मिता पर आघात कर रही थीं। मेरे कंधे तुम्हारे सपनों का बोझ ढोते रहे, और तुम्हारी प्रसिद्धि की लालसा मेरी आहुति को प्रश्नांकित करती रही। तब मैंने जाना कि तुम्हारी मित्रता सच में कफन जैसी सफेद और मौत जैसी ठंडी है।

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