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भीगी यादें

रुचि अग्रवाल, सिलीगुड़ी (पश्चिम बंगाल)

पहली बारिश की बूँद जैसे ही धरती को छूती है, कुछ अजीब-सा होता है। खिड़की के बाहर मौसम बदलता है, लेकिन भीतर दिल के किसी कोने में भी हलचल शुरू हो जाती है। अचानक कोई पुराना गीत अच्छा लगने लगता है, किसी की मुस्कान याद आ जाती है और कभी-कभी तो बरसों पुरानी बातें भी किसी फिल्म की तरह आँखों के सामने घूमने लगती हैं। आखिर बारिश में ऐसा क्या है, जो पुरानी यादों की अलमारी अपने-आप खुल जाती है?

शायद इसकी शुरुआत उस मिट्टी की खुशबू से होती है, जिसे हम “सौंधी महक” कहते हैं। यह खुशबू केवल मिट्टी की नहीं होती; इसमें बचपन की कागज़ की नावें, स्कूल की छुट्टियाँ, छत पर भीगना, माँ की डाँट और गरमा-गरम पकौड़ों की महक भी घुली होती है। एक बूँद गिरती है और यादों का पूरा कारवाँ निकल पड़ता है।

बारिश का मौसम वैसे भी बड़ा शरारती होता है। यह बिना दरवाज़ा खटखटाए दिल में उतर आता है। धूप वाले दिनों में हम काम, ज़िम्मेदारियों और भागदौड़ में इतने व्यस्त रहते हैं कि यादों को समय ही नहीं दे पाते। लेकिन जैसे ही बाहर बारिश शुरू होती है, दुनिया थोड़ी धीमी हो जाती है। तब दिल को मौका मिल जाता है पुरानी डायरी के पन्ने पलटने का।

कई लोगों के लिए बारिश का मतलब किसी खास व्यक्ति की याद भी होता है। वह, जिसके साथ कभी एक छतरी साझा की थी; जिसके साथ भीगते हुए लंबी बातें की थीं; या जिसे देखकर पहली बार दिल ने कुछ अलग महसूस किया था। मज़े की बात यह है कि कभी-कभी वह व्यक्ति अब जीवन में होता भी नहीं, लेकिन बारिश को जैसे उसका पता आज भी याद रहता है। हर बरसात में वह चुपके से उसका नाम कानों में फुसफुसा देती है।

और अगर कोई प्रेम कहानी न भी हो, तब भी बारिश खाली हाथ नहीं आती। वह कॉलेज के दोस्तों की मस्ती, मोहल्ले के क्रिकेट मैच, खिड़की के पास बैठकर किताब पढ़ने के दिन और बिना वजह हँसने वाले पल साथ ले आती है। शायद इसी कारण बरसात हमें भावुक भी करती है और मुस्कुराने पर भी मजबूर कर देती है।

दिलचस्प बात यह है कि बारिश हमें यह एहसास भी दिलाती है कि समय भले ही आगे बढ़ गया हो, लेकिन कुछ यादें कभी बूढ़ी नहीं होतीं। वे हमारे भीतर कहीं सुरक्षित रहती हैं और बारिश की बूँदें उन्हें जगाने का काम करती हैं। जैसे कोई पुराना दोस्त अचानक सामने आ जाए और कहे, “याद है, हम कितने बेफिक्र थे?”

तो अगली बार जब बारिश हो और आप खिड़की के पास बैठकर मुस्कुरा रहे हों या किसी पुरानी याद में खो जाएँ, तो हैरान मत होइए। यह केवल मौसम का असर नहीं है। यह दिल और बारिश की पुरानी दोस्ती है, जो हर साल मिलकर हमारी यादों के साथ थोड़ी-सी शरारत कर जाती है। आखिर कुछ रिश्ते ऐसे होते हैं, जो शब्दों से नहीं, बूँदों से बातें करते हैं।

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