बारिश में गीली सड़क पर फिसलती चप्पल और एंटी-स्लिप स्लिपर का प्रदर्शन

बारिश में चप्पल क्यों फिसलती है ?

मानसून में गीली सड़क और टाइल्स पर फिसलने की घटनाएं बढ़ जाती हैं. जानिए चप्पल की ग्रिप क्यों कमजोर पड़ती है, इसके वैज्ञानिक कारण और बारिश में सुरक्षित रहने के आसान उपाय.

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भीगी यादें

बारिश की पहली बूँद के साथ क्यों लौट आती हैं बचपन, प्रेम और बीते दिनों की यादें? यह लेख मानसून, सौंधी मिट्टी की महक और दिल की भावनाओं के उस अनकहे रिश्ते को खूबसूरती से शब्द देता है, जिसे लगभग हर व्यक्ति कभी न कभी महसूस करता है।

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बरसात में…

बरसात को जीवन, प्रकृति और मानवीय अनुभवों का प्रतीक बनाकर प्रस्तुत किया गया है। बारिश की बूंदें पत्तों और फूलों पर मोती की तरह टपकती हैं, बिजली के तारों पर झिलमिलाती हैं और धरती में अमृत जैसी बूंदों के रूप में समा जाती हैं। वहीं, जर्जर मकान ढहते हैं और लोग अपने घरों और यादों को बचाने के लिए प्रयास करते हैं। शहर और गाँव की सड़कों पर बच्चे बारिश में खेलते हैं, नदियाँ अपने भीषण बहाव में सब कुछ बहा लेती हैं, और जानवर तथा पक्षी अपनी परिस्थितियों से जूझते हैं। इसके बीच, बरसात जीवन में रिश्तों, साहस और मानवीय संवेदनाओं को पुनर्जीवित करती है। कविता यह दर्शाती है कि बरसात का सौंदर्य और जीवन में उसकी भूमिका पहले जैसी रह गई है, लेकिन अब वह पहले जैसी रूमानी नहीं लगती।

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बूँदों की पदचाप…

मैं ध्यानमग्न होकर आज वर्षा की बूँदों की पदचाप सुन रही हूँ। ये बूँदें जैसे कोई देववधू बनकर घूँघट काढ़े आई हों और धरती से मधुर आलिंगन कर उसका संताप हर रही हों। मिट्टी में मिलकर अंकुरित होने लगीं, मानो जीवन की नई कोंपलें फूटने लगी हों। पूरी प्रकृति जैसे किसी रचनात्मक क्रीड़ा में सम्मिलित हो गई हो। इन बूँदों ने तन-मन को धोकर शुद्ध कर दिया, और भीतर की Maya को खोज निकाला। प्रत्येक बूँद अब एक मोती बन गई है, जिसे मन सहेज रहा है, मानो किसी गूढ़ तत्व से मिलने का जाप हो रहा हो।

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