
रुचि अग्रवाल, सिलीगुड़ी (पश्चिम बंगाल)
कुछ लोग कहते हैं कि चाय सिर्फ एक पेय है। लेकिन जिन्होंने कभी किसी खास के साथ बारिश की शाम में चाय पी हो, वे जानते हैं कि चाय केवल चाय नहीं होती। वह कभी मुस्कान बन जाती है, कभी बहाना, तो कभी दो दिलों के बीच चुपचाप चल रही बातचीत की सबसे प्यारी साथी। और जब चाय थोड़ी मनचली हो जाए, तब उसकी बात ही कुछ और होती है।
मनचली चाय बिल्कुल उस शख्स की तरह होती है, जो बिना कुछ कहे भी दिल की धड़कनें बढ़ा दे। सुबह की नींद भरी आँखों में जब इसकी खुशबू दस्तक देती है, तो लगता है जैसे कोई शरारती दोस्त कान में धीरे से कह रहा हो, “उठो, आज का दिन कुछ खास होने वाला है।”
चाय और प्रेम का रिश्ता भी बड़ा अनोखा है। मोहब्बत की कई कहानियाँ किसी महंगे रेस्तरां से नहीं, बल्कि सड़क किनारे की छोटी-सी चाय की दुकान से शुरू हुई हैं। एक कप चाय, दो मुस्कानें और ढेर सारी बातें—बस इतना ही काफी होता है दिलों को करीब लाने के लिए।
कभी गौर किया है? जब सामने वाला आपका पसंदीदा इंसान हो, तो चाय भी कुछ ज्यादा मीठी लगने लगती है। भले ही चीनी उतनी ही हो, लेकिन बातों का स्वाद उसमें घुल जाता है। फिर शुरू होता है वह प्यारा सिलसिला
“एक घूंट तुम लो, एक घूंट मैं लेता हूँ।” और चाय, बेचारे कप में रहकर भी, दो लोगों के बीच की दूरी कम कर देती है।
बारिश के मौसम में तो मनचली चाय अपनी पूरी रंगत में होती है। खिड़की पर गिरती बूंदें, हल्की-सी ठंडी हवा और हाथों में गर्म चाय का कप। ऐसे में अगर कोई शरारती मुस्कान वाला साथी सामने बैठा हो, तो चाय भी शायद कप में मुस्कुराने लगती होगी। हर घूंट जैसे कोई नई कहानी सुनाता है और हर भाप में कोई पुरानी याद तैरती दिखाई देती है।
दिलचस्प बात यह है कि चाय कभी जल्दी में नहीं पी जाती। वह हमें ठहरना सिखाती है। कुछ पल खुद के लिए, कुछ पल अपनों के लिए। शायद इसी कारण चाय के साथ की गई बातें अक्सर याद रह जाती हैं, जबकि बड़ी-बड़ी मुलाकातें समय के साथ धुंधली पड़ जाती हैं।
मनचली चाय का असली जादू उसकी सादगी में छिपा है। वह किसी दिखावे की मोहताज नहीं होती। मिट्टी के कुल्हड़ में मिले या चीनी मिट्टी के कप में, उसका अंदाज़ हमेशा दिल जीतने वाला होता है। वह कभी दोस्ती को गहरा करती है, कभी प्रेम को नया रंग देती है और कभी अकेलेपन को भी अपना साथी बना लेती है।
तो अगली बार जब आप चाय का कप हाथ में लें, तो उसे केवल एक पेय समझकर न पीजिए। उसकी खुशबू में छिपी शरारत को महसूस कीजिए, उसकी गर्माहट में छिपे अपनापन को पहचानिए। कौन जाने, आपकी वह साधारण-सी चाय भी किसी खूबसूरत याद, किसी मीठी मुस्कान या किसी नई कहानी की शुरुआत बन जाए। आखिर, मनचली चाय का काम ही है दिलों में हलचल मचाना और जिंदगी में थोड़ी-सी मोहब्बत घोल देना।
इन रचनाओं को भी पढ़ें
भीगी यादें
‘मेरा अनुरागी मन’
सच्चा दोस्त : एक अनमोल तोहफ़ा
शब्दों का मौन
मैं जानता हूँ, फिर भी…
माँ
कर्ण की व्यथा
मनचली चाय
अनमोल सौगात हो तुम
