भीगी यादें
बारिश की पहली बूँद के साथ क्यों लौट आती हैं बचपन, प्रेम और बीते दिनों की यादें? यह लेख मानसून, सौंधी मिट्टी की महक और दिल की भावनाओं के उस अनकहे रिश्ते को खूबसूरती से शब्द देता है, जिसे लगभग हर व्यक्ति कभी न कभी महसूस करता है।

बारिश की पहली बूँद के साथ क्यों लौट आती हैं बचपन, प्रेम और बीते दिनों की यादें? यह लेख मानसून, सौंधी मिट्टी की महक और दिल की भावनाओं के उस अनकहे रिश्ते को खूबसूरती से शब्द देता है, जिसे लगभग हर व्यक्ति कभी न कभी महसूस करता है।
बरसात को जीवन, प्रकृति और मानवीय अनुभवों का प्रतीक बनाकर प्रस्तुत किया गया है। बारिश की बूंदें पत्तों और फूलों पर मोती की तरह टपकती हैं, बिजली के तारों पर झिलमिलाती हैं और धरती में अमृत जैसी बूंदों के रूप में समा जाती हैं। वहीं, जर्जर मकान ढहते हैं और लोग अपने घरों और यादों को बचाने के लिए प्रयास करते हैं। शहर और गाँव की सड़कों पर बच्चे बारिश में खेलते हैं, नदियाँ अपने भीषण बहाव में सब कुछ बहा लेती हैं, और जानवर तथा पक्षी अपनी परिस्थितियों से जूझते हैं। इसके बीच, बरसात जीवन में रिश्तों, साहस और मानवीय संवेदनाओं को पुनर्जीवित करती है। कविता यह दर्शाती है कि बरसात का सौंदर्य और जीवन में उसकी भूमिका पहले जैसी रह गई है, लेकिन अब वह पहले जैसी रूमानी नहीं लगती।