मैं पापा की नन्ही परी" एक भावुक हिंदी कविता है, जिसमें शहीद सैनिक की बेटी अपने पिता के बिछड़ने का दर्द, माँ की पीड़ा और अपने अनकहे भावों को मार्मिक शब्दों में व्यक्त करती है।

मैं पापा की नन्ही परी

एक शहीद सैनिक की बेटी की दृष्टि से लिखी गई यह हृदयस्पर्शी कविता पिता के बलिदान, माँ के दुःख और एक बेटी के अधूरे स्नेह की कहानी कहती है। “मैं पापा की नन्ही परी” पाठकों की संवेदनाओं को गहराई से छू लेने वाली रचना है।

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घर में महसूस होती माँ की उपस्थिति और ममता को दर्शाती भावनात्मक हिंदी कविता का दृश्य

शायद माँ आयी है

‘शायद माँ आई है’ एक ऐसी भावनात्मक कविता है जिसमें माँ सीधे दिखाई नहीं देती, लेकिन उसकी आदतें, सहेजने का ढंग और प्रेम घर के हर कोने में महसूस होता है। यह कविता मातृत्व की उस अनकही उपस्थिति को शब्द देती है जो हमेशा साथ रहती है।

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चाँदनी रात और मंद समीर के बीच प्रेम और यादों में खोए दो लोगों का भावनात्मक दृश्य।

मनवा खाए हिचकोले

मनवा खाए हिचकोले” एक ऐसी प्रेम कविता है जिसमें समीर, यादों की खुशबू, चाँदनी और धड़कनों के माध्यम से प्रेम की कोमल अनुभूतियों को अभिव्यक्ति मिली है।

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पुरानी कलाई घड़ी और उसके साथ रखी पारिवारिक यादें, जो भावनात्मक लगाव और स्मृतियों का प्रतीक हैं।

घड़ी

यह कविता एक साधारण-सी घड़ी से जुड़े गहरे भावनात्मक संबंध को व्यक्त करती है। पिता द्वारा विवाह में उपहार में दी गई घड़ी केवल समय बताने का साधन नहीं, बल्कि प्रेम, दुआओं और स्मृतियों की अमूल्य निशानी बन जाती है। उसके खो जाने के बाद भी उससे जुड़ी यादें मन में जीवित रहती हैं।

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रात में मेज पर बैठा एक लेखक, जो अनकहे शब्दों और गहरे विचारों में खोया हुआ है।

ठहरे हुए लफ़्ज़

यह भावपूर्ण कविता उन अनकहे लफ़्ज़ों की कहानी कहती है, जो मन में ठहर तो जाते हैं, लेकिन सही समय और अभिव्यक्ति न मिलने पर अंतस की गहराइयों में कहीं खो जाते हैं।

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माँ को भी सुनो कभी

माँ के प्रेम, त्याग और अनकही भावनाओं को व्यक्त करती यह भावपूर्ण कविता हमें याद दिलाती है कि माँ सिर्फ हमारी देखभाल करने वाली नहीं, बल्कि अपने सपनों और भावनाओं वाली एक संवेदनशील इंसान भी है।

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अपनी संतान को स्नेह से सहलाती और गोद में संभालती भारतीय माँ का भावुक दृश्य।

ममता की छाया है माँ

यह कविता माँ के निस्वार्थ प्रेम, स्नेह और हर कठिन परिस्थिति में संतान का सहारा बनने वाले उनके अनमोल स्वरूप को सुंदर शब्दों में व्यक्त करती है।

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अपने बचपन के प्रेम और पुरानी यादों में खोई एक युवती, धूप भरे माहौल में पुराने घर की ओर भावुक नज़रों से देखते हुए।

सब कुछ याद है मुझे

विजया डालमिया, हैदराबाद वो हमारा दीवानापन थाया बचपन की मोहब्बत,जिसे दोस्ती का नाम देकरकरते थे हर पल शरारत। बड़े होने पर भीसब कुछ याद है मुझे…. छोटी-छोटी ज़िद, छोटी-छोटी तकरार,देती थी लंबी-सी खुशी।वो तपती धूप मेंएकटक उसके घर की ओर ताकते रहना,उसकी एक झलक पाने के लिए। पैरों में पड़े फफोलों को देखकरउसका मुझे डाँटना,और…

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