माँ जैसा कोई नहीं…

अपने बच्चे को गोद में उठाए मुस्कुराता पिता और पास में स्नेह से देखती माँ का भावुक पारिवारिक दृश्य।

विनती झुनझुनवाला, मुंबई

दिन भर की थकन
भूल जाता है,
अपनी संतान को जब
बाहों में उठाता है,
कांधे पर झूलाता है,
उस बाप में भी मुझे
एक माँ नज़र आती है।

नन्हे-नन्हे हाथों से
जब माथा मेरा दबाती है,
जब मेरी चिंता करती है,
तब छोटी-सी गुड़िया मेरी
माँ मेरी बन जाती है।

हर आँसू को पी जाती है,
हँसकर दर्द भी सह जाती है,
वो जब अपने बच्चे को
इस दुनिया में लाती है।

क्या कहूँ उसके लिए यारो,
वो जो एक माँ है,
अपने बच्चे की खातिर
वो कायनात से भी
लड़ जाती है।

इन रचनाओं को भी पढ़ें
ममता की छाया है माँ
रात भर एक करवट है माँ
पार्थ कहने वाली लड़की
कब आओगे तुम ?
माँ: जीवन आधार
माँ जैसा कोई नहीं…
ख़ुशबू माँ के साथ की

2 thoughts on “माँ जैसा कोई नहीं…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *