Live Wire News literary portal with Gulmohar and Rajnigandha flowers

माँ…

अपनी संतान को स्नेह और सुरक्षा का एहसास कराती माँ का भावुक और शांत दृश्य।

डॉ.शशिकला पटेल, मुंबई

तुम दूर ही सही मगर पास हो सदा
इस जहां में सबसे खास हो सदा
जीवन बगिया में फूल भी हैं, शूल भी
शूलों में भी फूल का आभास हो सदा।

लड़खड़ाए कदम तब तुम बन गई संबल
गिरकर संभलने का तुमसे ही मिला बल
चलना सिखाया तूने, मनोबल दिया इतना
धूप में भी छांव का एहसास हो सदा।

खुशियां हैं, जो सब तेरा ही है करम
आंचल तेरी ममता का साथ है हरदम
कोई साजिश जमाने की छू न ले कहीं
बन के कवच, माँ, तुम आसपास हो सदा।

बेरूखी के बादल छाये हों जब घनेरे
तेरी ही प्रेरणा से उठते हैं कदम मेरे
मौसम मिजाज लगता है जब बदलने
बन के सावन भरती उल्लास हो सदा।

इन रचनाओं को भी पढ़ें
ममता की छाया है माँ
रात भर एक करवट है माँ
पार्थ कहने वाली लड़की
कब आओगे तुम ?
माँ: जीवन आधार
माँ जैसा कोई नहीं…
ख़ुशबू माँ के साथ की

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *