
रुचि अग्रवाल, सिलीगुड़ी (पश्चिम बंगाल)
मां सिर्फ जन्मदायिनी नहीं
मां शब्द तो इक सम्मान है
छोटे-छोटे परिंदों का
बड़ा….. आसमान है।
मां जिंदगी की धूप में
वृक्ष की सी छांव है
रखती संतान के प्रति ये मन में
निस्वार्थ निश्चल भाव है।
लगे कठोर ये ऊपरी सतह पर
पर मन में रखती ममता है
संतान के सुख पर सब कुछ लूटा दे
लांघकर अपनी क्षमता है ।
कठोर परिश्रम दिन-रात करके
अंगारों पर चलती है
बच्चों का भविष्य रोशन करने को
स्वयं को अनदेखा करती है।
हर जिद हर ख्वाहिश बच्चों की
मां से पूरी होती है
वरना जिंदगी की कठिन राहों पर तो
ज़रूरतें ही मुश्किलों से पूरी होती है
अपने आंसू छिपाकर जो
संतान को हंसाती है ,
अपना सुखचैन ताक पर रखकर
बच्चों को सुखी बनाती है ,
खुद जीवन में ठोकर खाकर
बच्चों को चलना सिखाती है
खुद पतवार बन करके
बच्चों को पार लगाती है ।
ऊपर गुस्सा अंदर प्रेम
यही मां की पहचान है
मां की छत्रछाया में सुरक्षित
संतान की हर सुबह और शाम है।।।।
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