माँ
पल्लू में बँधा आसमाँ
“पल्लू में बँधा आसमाँ” माँ की ममता, स्मृतियों और भावनात्मक विरासत को समर्पित एक मार्मिक हिंदी कहानी है। माधव अपनी दिवंगत माँ की पुरानी साड़ी को केवल एक वस्त्र नहीं, बल्कि बचपन की सुरक्षा, प्रेम और अपनत्व का प्रतीक मानता है। उसकी मंगेतर अनन्या उस साड़ी को अपने विवाह के जोड़े का हिस्सा बनाकर यह सिद्ध करती है कि सच्ची विरासत वस्तुओं में नहीं, उनसे जुड़ी भावनाओं में बसती है। यह कहानी माँ के अटूट स्नेह और परिवार के अमूल्य रिश्तों को बेहद संवेदनशीलता से प्रस्तुत करती है।
“छटती धुंध”
समाचारों में बुज़ुर्गों के साथ बढ़ते अत्याचार की खबरें मन में भय और भविष्य की चिंता भर देती हैं। लेकिन एक दिन बेटे-बहू का लिया गया छोटा-सा निर्णय एक माँ के जीवन की सारी धुंध छाँट देता है। पढ़िए “छटती धुंध”, परिवार, अपनत्व और बुज़ुर्गों के सम्मान का मार्मिक संदेश देती एक भावनात्मक लघुकथा।
नारी, तुम नारायणी…
नारी केवल एक रिश्ता नहीं, बल्कि प्रेम, त्याग, विश्वास और सृजन की अद्भुत शक्ति है। ‘नारी तुम नारायणी हो’ कविता स्त्री के उसी दिव्य स्वरूप को शब्दों में नमन करती है, जो जीवन को संवेदना, शक्ति और अर्थ प्रदान करती है।
माँ होना ही कठिन लगा
माँ को बचपन में सिर्फ एक जिम्मेदार व्यक्ति के रूप में देखा था, लेकिन समय के साथ समझ आया कि माँ होना संसार का सबसे कठिन और सबसे सुंदर दायित्व है। यह कविता माँ के त्याग, धैर्य और मौन प्रेम को श्रद्धांजलि है।
टूट जाती हूँ जब…
वृद्धाश्रम में रह रही एक माँ के मन की पीड़ा, बच्चों के प्रति अटूट प्रेम और उपेक्षा के दर्द को अभिव्यक्त करती यह मार्मिक कविता पाठकों को रिश्तों, संस्कारों और मानवीय संवेदनाओं पर गहराई से सोचने के लिए प्रेरित करती है।
एकांत का शोर
“एकांत का शोर” एक मार्मिक कहानी है जो पिता के निधन के बाद माँ के जीवन में पसरे अकेलेपन और बेटे की व्यस्तता के बीच बढ़ती भावनात्मक दूरी को चित्रित करती है। जब बेटा अपनी माँ को आधी रात अपनी तस्वीर को सीने से लगाकर लोरी सुनाते हुए देखता है, तब उसे एहसास होता है कि सफलता की दौड़ में उसने सबसे अनमोल रिश्ते को अनदेखा कर दिया है।
“हर हिस्से की गूँज है माँ”
माँ केवल एक रिश्ता नहीं, बल्कि हमारे अस्तित्व की सबसे गहरी गूँज होती है। “हर हिस्से की गूँज है माँ” एक बेटी की भावुक स्मृतियों से बुना गया ऐसा संस्मरण है, जिसमें माँ के प्रेम, अनुशासन, त्याग, संवेदनाओं और बिछड़ने के दर्द को बेहद आत्मीयता से व्यक्त किया गया है। यह लेख हर उस व्यक्ति के दिल को छू जाएगा, जिसने अपनी माँ के स्नेह को महसूस किया है।
माँ को भी सुनो कभी
माँ के प्रेम, त्याग और अनकही भावनाओं को व्यक्त करती यह भावपूर्ण कविता हमें याद दिलाती है कि माँ सिर्फ हमारी देखभाल करने वाली नहीं, बल्कि अपने सपनों और भावनाओं वाली एक संवेदनशील इंसान भी है।
