
कंचनमाला ‘अमर’ (उर्मी)
ममता की छाया है माँ,
मुश्किल को हरती है माँ।
धड़कन में बसती है माँ,
सबसे ऊपर होती है माँ।
कभी थकन जो हमें रुलाए,
घाव अगर दुनिया दे जाए,
तब थपकी दे वो सहलाए,
फिर से नूतन राह दिखाए।
दर्द सभी वह खुद पर लेती,
नींद गँवाकर ख्वाब देखती।
गिरने पर वो हमें उठाती,
ख़ुद की चोट की फिक्र न करती।
नर्म हथेली, स्नेहिल साथ,
मोहे मन को उसकी बात।
परे हैं शब्दों से जज़्बात,
माँ से ही है हर सौगात।
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