माँ की ममता
माँ होना ही कठिन लगा
माँ को बचपन में सिर्फ एक जिम्मेदार व्यक्ति के रूप में देखा था, लेकिन समय के साथ समझ आया कि माँ होना संसार का सबसे कठिन और सबसे सुंदर दायित्व है। यह कविता माँ के त्याग, धैर्य और मौन प्रेम को श्रद्धांजलि है।
मैं परछाईं माँ की
“मैं परछाईं माँ की” एक भावपूर्ण हिंदी कविता है, जिसमें माँ के संघर्ष, संस्कार, प्रेम और आशीर्वाद को बेटी की भावनाओं के माध्यम से खूबसूरती से व्यक्त किया गया है।
ममता की छाया है माँ
यह कविता माँ के निस्वार्थ प्रेम, स्नेह और हर कठिन परिस्थिति में संतान का सहारा बनने वाले उनके अनमोल स्वरूप को सुंदर शब्दों में व्यक्त करती है।
माँ जैसा कोई नहीं…
यह कविता माँ की ममता, उसके संघर्ष, त्याग और बच्चों के लिए उसके अथाह प्रेम को बेहद भावुक और सुंदर शब्दों में प्रस्तुत करती है।
बाई, आज तू होती तो…
बाई की वह मुद्रा कभी अचानक नहीं होती थी. पूरा महीना इंतज़ार करने के बाद, जब मैं पुणे से अपने घर लौटता, तो माँ हमारे पहले मकान के पहले कमरे में खिड़की खोलकर बैठी होती थी. कहने को तो वह दूध लेने वाले का इंतज़ार कर रही होती थी, पर असल में उसे मेरा ही इंतज़ार होता था. जैसे ही मैं दरवाज़े से भीतर कदम रखता, वह हल्की-सी मुस्कान के साथ एक ही नज़र में मेरा पूरा एक्स-रे कर लेती.. दुबला तो नहीं हुआ, काला तो नहीं हो गयाए बाल और स़फेद हुए या डाई नहीं की. कुछ भी उससे छुपा नहीं रहता था.
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