मातृत्व
ज़िम्मेदारियां अपनी-अपनी
एक सफल आईपीएस अधिकारी की ज़िंदगी का वह मोड़, जहाँ कर्तव्य, मातृत्व, परिवार और भविष्य की चिंता आमने-सामने खड़े हो जाते हैं। यह संवेदनशील कहानी विशेष आवश्यकता वाले बच्चों, पारिवारिक जिम्मेदारियों और माता-पिता के कठिन निर्णयों पर गहरा प्रश्न उठाती है।
पालना महान है !
क्या किसी बच्चे को जन्म देना ही सबसे बड़ा पुण्य है, या उसका प्रेम, त्याग और जिम्मेदारी के साथ पालन-पोषण करना अधिक महान है? “पालना महान है!” कविता इसी प्रश्न को केंद्र में रखकर समाज की स्थापित धारणाओं को चुनौती देती है। यह रचना मातृत्व-पितृत्व, स्वार्थ, कर्तव्य और जीवन के दार्शनिक पक्ष पर गंभीर विमर्श प्रस्तुत करती है। संवेदनशील भाषा और तीखे प्रश्नों के माध्यम से कविता पाठक को आत्ममंथन के लिए प्रेरित करती है।
आश्वासन
‘आश्वासन’ एक ऐसी मार्मिक हिंदी कहानी है, जिसमें एक माँ अदालत के सामने अपनी अजन्मी बेटी की सुरक्षा को लेकर सवाल उठाती है। यह कहानी केवल कन्या भ्रूण-हत्या पर नहीं, बल्कि समाज, कानून और महिला सुरक्षा की वास्तविक स्थिति पर गहरा चिंतन प्रस्तुत करती है। अंत का प्रश्न पाठक के मन में लंबे समय तक गूंजता रहता है।
माँ होना ही कठिन लगा
माँ को बचपन में सिर्फ एक जिम्मेदार व्यक्ति के रूप में देखा था, लेकिन समय के साथ समझ आया कि माँ होना संसार का सबसे कठिन और सबसे सुंदर दायित्व है। यह कविता माँ के त्याग, धैर्य और मौन प्रेम को श्रद्धांजलि है।
टूट जाती हूँ जब…
वृद्धाश्रम में रह रही एक माँ के मन की पीड़ा, बच्चों के प्रति अटूट प्रेम और उपेक्षा के दर्द को अभिव्यक्त करती यह मार्मिक कविता पाठकों को रिश्तों, संस्कारों और मानवीय संवेदनाओं पर गहराई से सोचने के लिए प्रेरित करती है।
एकांत का शोर
“एकांत का शोर” एक मार्मिक कहानी है जो पिता के निधन के बाद माँ के जीवन में पसरे अकेलेपन और बेटे की व्यस्तता के बीच बढ़ती भावनात्मक दूरी को चित्रित करती है। जब बेटा अपनी माँ को आधी रात अपनी तस्वीर को सीने से लगाकर लोरी सुनाते हुए देखता है, तब उसे एहसास होता है कि सफलता की दौड़ में उसने सबसे अनमोल रिश्ते को अनदेखा कर दिया है।
