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नवरात्रि में सजी हुई माँ दुर्गा की प्रतिमा, दीपों और भक्तों के साथ पूजा का दृश्य

माँ का आगमन

“माँ के आगमन का पैगाम” एक सुंदर और भावपूर्ण भक्ति कविता है, जो नवरात्रि के पावन अवसर पर माँ दुर्गा के आगमन की खुशी और आध्यात्मिक ऊर्जा को व्यक्त करती है। इस कविता में प्रकृति और मानव जीवन के बीच के उस गहरे संबंध को दर्शाया गया है, जो माँ के आगमन के साथ नवजीवन और उत्साह से भर उठता है।

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Live Wire News लेखन प्रतियोगिता के परिणाम घोषित, 3 को प्रथम पुरस्कार

मौसमी चंद्रा, रेनू शब्द मुखर और डॉ. रत्ना माणिक ने जीता प्रथम पुरस्कार

लाइव वॉयर न्यूज लेखन प्रतियोगिता के परिणाम घोषित कर दिए गए हैं। मौसमी चंद्रा,रेनू
शब्द मुखर और डॉ. रत्ना माणिक ने प्रथम पुरस्कार हासिल किया, जबकि अन्य रचनाकारों को भी विभिन्न श्रेणियों में सम्मानित किया गया।

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मैं लिखने बैठी हूँ – भावनाओं और रचनात्मकता पर आधारित हिंदी कविता

मैं लिखने बैठी हूँ

“मैं लिखने बैठी हूँ” एक भावनात्मक हिंदी कविता है जिसमें कवयित्री अपने मन में उमड़ते विचारों, जीवन के अनुभवों, प्रेम, प्रकृति और स्मृतियों को शब्दों में व्यक्त करती है। यह कविता आत्मा की आवाज़ और संवेदनाओं की गहराई को सुंदर ढंग से प्रस्तुत करती है।

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नारी दिवस की जरूरत नहीं – स्त्री सम्मान और संवेदना पर आधारित भावनात्मक हिंदी कविता

नारी दिवस की ज़रूरत नहीं…

“नारी दिवस की ज़रूरत नहीं” एक संवेदनशील हिंदी कविता है जो बताती है कि स्त्री को एक दिन के उत्सव से ज्यादा रोज़ मिलने वाले सम्मान, स्नेह और समझ की आवश्यकता है। छोटे-छोटे भावनात्मक क्षण ही असली महिला सशक्तिकरण का आधार हैं।

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जीत का एहसास – संघर्ष और आत्मविश्वास पर आधारित प्रेरक हिंदी कविता

जीत का एहसास

“जीत का एहसास” एक प्रेरक हिंदी कविता है जो संघर्ष, धैर्य और आत्मविश्वास की शक्ति को दर्शाती है। यह कविता बताती है कि असली जीत मंजिल नहीं बल्कि मन में बसने वाला विश्वास और प्रयास है।

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नारी कमजोर नहीं – नारी शक्ति और आत्मसम्मान पर आधारित प्रेरक हिंदी कविता

नारी कमजोर नहीं

“नारी कमजोर नहीं” एक प्रभावशाली हिंदी कविता है जो स्त्री की शक्ति, आत्मसम्मान और साहस को उजागर करती है। यह कविता समाज को चेतावनी देती है कि नारी को कमज़ोर समझना सबसे बड़ी भूल है और सम्मान ही उसके अस्तित्व का आधार है।

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स्वयंसिद्धा प्रेरक हिंदी कविता जो संघर्ष और सफलता की कहानी बताती है

स्वयंसिद्धा

“स्वयंसिद्धा” एक प्रेरक हिंदी कविता है जो आत्मविश्वास, संघर्ष और मेहनत की शक्ति को दर्शाती है। यह कविता बताती है कि कठिन परिस्थितियों में भी यदि मन में विश्वास और सपनों की रोशनी हो, तो सफलता का सूरज अवश्य उगता है।

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यमुना तट पर खड़े भगवान कृष्ण और उनके सम्मुख नतमस्तक भक्त का भावपूर्ण दृश्य, जो भक्ति और निस्वार्थ प्रेम का प्रतीक है.

कान्हा, मुझे मीरा ही बना लेना

यह कविता कृष्ण-प्रेम की परंपरा में समर्पण, भक्ति और निस्वार्थ प्रेम की एक अंतर्यात्रा है. इसमें राधा और मीरा के प्रतीकों के माध्यम से आत्मा का ईश्वर से संवाद रचा गया है. प्रेम यहाँ भय से परे, सामाजिक रिवाजों से टकराता हुआ भी अडिग रहता है. जब प्रेम का अधिकार न मिले, तब दर्शन, और अंततः स्वयं को बाँसुरी बना देने की चाह यह रचना उसी परम समर्पण की अभिव्यक्ति है.

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एक जोड़ा चुपचाप शाम के समय एक शांत कमरे में बैठा है, पुरुष अपनी प्रेमिका के पास हाथ रखकर, दोनों के चेहरे पर कोमल भाव, हृदय की धड़कन और नज़दीकी की अनुभूति साफ़ झलक रही है।

चुपचाप, बस तुम्हारे पास

उनके साथ बिताया हर पल कुछ अलग ही होता था। न वो कुछ कहते, न ही जताते, फिर भी उनकी उपस्थिति में सब कुछ पूरा लगता। इंतजार भी मीठा लगता और दिल की धड़कन की रफ़्तार को संभालते हुए, हम बस उनके पहलू में बैठते रहते। शामें इतनी खामोशी से गुजरतीं कि शब्द भी कम पड़ जाते, और हर लम्हा अपने आप में रूह तक पहुँचने वाला एहसास बन जाता। यही वह समय था, जब मौन ही सबसे गहरी बातें कह जाता।

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सूरज देखे हैं

हर नए सूरज की किरणें उम्मीद और नई उमंगों का संदेश देती हैं। ओस की बूँदों, उड़ते पक्षियों और शांति भरे क्षितिज के बीच यह दृश्य जीवन के हर अंत में नए आरंभ की प्रेरणा देता है।

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