स्वयंसिद्धा

स्वयंसिद्धा प्रेरक हिंदी कविता जो संघर्ष और सफलता की कहानी बताती है

अंशु जैन, प्रसिद्ध लेखिका, देहरादून

मैं स्वयं सिद्धा कवियत्री हूँ,
मेरी कविता मेरी पहचान है,
मैं अपने शब्दों से दुनिया को बदलने की कोशिश करती हूँ।

जीवन की राहों में था अंधकार,
सपनों से भरी थी दिल की दरार।
संघर्ष की लहरें उठीं बार-बार,
फिर भी कदमों ने छोड़ा न आसार।

सिद्धा ने सीखा खुद से लड़ना,
हर चुनौती को चुपचाप सहना।
मंज़िल दूर थी, पर हिम्मत क़रीब,
दिल में बसी थी सफलता की तसवीर।

रातों को जागकर जलाया दीप,
मेहनत से गढ़ा हर सपना अनमोल।
थकावट को जीतकर किया विश्वास,
कि संघर्ष के आगे झुकेगी हर बात।

फिर एक दिन सूरज मुस्काया,
मेहनत का फल मैंने पाया।
कामयाबी के पंख लेकर उड़ी,
खुशियों से भरी ज़िंदगी जुड़ी।

संदेश यही है, चाहे हो मुश्किल,
सपने साकार होंगे, बस रखो दिल।
संघर्ष है वो दीपक, जो जलाता,
कामयाबी का मार्ग दिखलाता।

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