चुपचाप, बस तुम्हारे पास

एक जोड़ा चुपचाप शाम के समय एक शांत कमरे में बैठा है, पुरुष अपनी प्रेमिका के पास हाथ रखकर, दोनों के चेहरे पर कोमल भाव, हृदय की धड़कन और नज़दीकी की अनुभूति साफ़ झलक रही है।

अनामिका गुप्ता, प्रसिद्ध लेखिका, अहमदाबाद

रूह तक पहुँचने का
अंदाज़ था ऐसा।

ना कुछ कहते थे
और ना जताते थे।
इंतजार भी मीठा लगता था।

दिल की धड़कन की रफ़्तार को
संभाल कर तेरे पहलू में बैठे रहते थे।

शाम इतनी खामोशी से
दबे पांव गुजर जाया करती थी।

शब्द भी कम पड़ते हैं
वो लम्हा बयां करने के लिए।

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