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खिड़की पर तिनके लिए बैठी एक नन्ही गौरैया, जो आशा और जीवन की ऊर्जा का प्रतीक दिखाई दे रही है।

गौरैया

खिड़की पर आकर चहकती गौरैया केवल एक पक्षी नहीं लगती, बल्कि जीवन की जिद और आशा का जीवंत रूप प्रतीत होती है। नन्ही चोंच में तिनके दबाए वह जैसे हर बार याद दिलाती है कि टूटे हुए घोंसले भी फिर से बसाए जा सकते हैं। उसकी चपल उड़ान और निरंतर प्रयास उस मन से संवाद करते हैं, जो उदासी और पीड़ा के बोझ तले थक चुका है। यह कविता गौरैया के माध्यम से जीवन, आशा और भीतर फिर से घर बनाने की इच्छा को संवेदनशीलता से अभिव्यक्त करती है।

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नारी केवल एक रिश्ता नहीं… वह सृष्टि की जननी, शक्ति, त्याग, भक्ति और साहस का स्वरूप है।

ईश्वर की सबसे अद्भुत रचना : नारी

यह ओजपूर्ण कविता नारी के विविध स्वरूपों—ममता, शक्ति, त्याग, भक्ति और साहस—का भावपूर्ण चित्रण करती है। गार्गी, सावित्री, लक्ष्मीबाई, मीरा और दुर्गा जैसी महान नारियों के माध्यम से स्त्री के अद्भुत अस्तित्व और उसकी अनंत ऊर्जा को दर्शाया गया है।

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प्रेम और विरह में डूबी एक महिला की भावुक प्रतीक्षा को दर्शाती यथार्थवादी छवि।

सजल

प्रेम की तन्हाइयों, विरह की पीड़ा और मिलन की अनंत प्रतीक्षा को भावपूर्ण शब्दों में पिरोती यह सुंदर सजल पाठकों के हृदय को गहराई से स्पर्श करती है। प्रेम में समर्पण, यादों की बेचैनी और मिलने की अटूट चाह इस रचना को अत्यंत मार्मिक बना देती है।

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कोरे पन्नों पर रंग भरती प्रेम भावना को दर्शाती हिंदी कविता “मैं इक किताब”

मैं इक किताब…

हम सबके भीतर एक कोरा पन्ना होता है, जिस पर समय और अनुभव धीरे-धीरे अपने रंग भरते हैं। इन्हीं रंगों से जीवन की कहानी बनती है. कभी खुशी, कभी अधूरी इच्छाओं के साथ। अंततः यही भावनाएँ हमें एक ऐसी किताब में बदल देती हैं, जिसे हम जीते भी हैं और समझते भी हैं।

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शिव पार्वती का दिव्य मिलन दर्शाती भावपूर्ण हिंदी कविता, तप और समर्पण का प्रतीक

आत्मा का समर्पण

हिमालय की गोद में जन्मी पार्वती के मन में केवल महादेव का ही नाम बसा था। उन्होंने कठोर तपस्या और अटूट विश्वास के साथ हर क्षण शिव को पुकारा। ऋतुएँ बदलती रहीं, समय बीतता रहा, पर उनका संकल्प कभी नहीं डगमगाया।

कैलाश पर समाधि में लीन शिव के भीतर भी एक सूक्ष्म स्पंदन था, जो पार्वती की भक्ति को महसूस कर रहा था। जब दोनों की दृष्टि मिली, तो वह मिलन केवल प्रेम नहीं, बल्कि आत्मा के पूर्ण समर्पण का प्रतीक बन गया जहाँ ‘मैं’ समाप्त होकर ‘हम’ का जन्म होता है।शिव और पार्वती का यह संग सृष्टि का आधार है, जो प्रेम, विश्वास और ऊर्जा का अनंत प्रकाश फैलाता है।

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"बोगनवेलिया सी लड़की: थोड़े प्यार में खिलने वाली मासूम कहानी"

बोगनवेलिया सी लड़की

यह कविता एक ऐसी सरल और संवेदनशील लड़की का चित्र खींचती है, जो बहुत कम चाहतों में भी खुश रहना जानती है। उसे बस थोड़ा सा प्यार और देखभाल चाहिए, और बदले में वह अपने स्नेह और समर्पण से जीवन को फूलों सा सजा देती है। वह बोगनवेलिया की तरह है नाज़ुक भी, मगर भीतर से बेहद मजबूत। चाहे परिस्थितियाँ उसे काटें-छांटें, वह बिना शिकायत खामोशी से अपने प्रेम और मासूमियत को बनाए रखती है।

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आत्मविश्वास से खड़ा व्यक्ति, चुनौतियों के बीच सफलता की ओर बढ़ता हुआ

“जिद से पहचान”

बदनाम से पहचान तक” एक गहरी भावनात्मक हिंदी ग़ज़ल है, जो इंसान के संघर्ष, आत्मसम्मान और समाज की बदलती सोच को दर्शाती है। यह ग़ज़ल बताती है कि जीवन में बदनामी या असफलता अंत नहीं होती, बल्कि वही हमारे लिए एक नई पहचान बनाने का अवसर बनती है। आज के दौर में जब लोग अक्सर दूसरों के बारे में जल्दी राय बना लेते हैं, यह रचना हमें धैर्य, मेहनत और आत्मविश्वास का महत्व सिखाती है।

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अल्हड़-सी मुस्कुराती भारतीय लड़की, चेहरे पर हल्की मुस्कान लेकिन आंखों में छुपा दर्द, रात का शांत वातावरण और भावनात्मक माहौल

मैं अल्हड़-सी लड़की

वह खुद को अल्हड़ कहती है- हँसती, खिलखिलाती, सबके बीच सहज दिखती हुई। मगर इस सहजता के पीछे एक शांत, गहरा सन्नाटा है, जहाँ उसके अधूरे ख़्वाब और अनकहे दर्द पलते हैं। वह अपने आँसुओं को पलकों में सजा कर रखती है, ताकि दुनिया उसकी मुस्कान ही देखे। रिश्तों की भीड़ में भी वह खुद को खोजती रहती है, हर बार टूटकर फिर संभल जाती है। उसकी कहानी शोर नहीं करती बस धीमे-धीमे महसूस होती है, जैसे रात की तन्हाई में कोई ख़ामोश उजाला।

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