
रुचि अग्रवाल, प्रसिद्ध लेखिका, सिलीगुड़ी (पश्चिम बंगाल)
माँ के आगमन का पैगाम
सबका मन हर्षाता है
पृथ्वी का हर कण कण मानो
नवजीवन को पाता है।
शक्ति स्वरूपा मात भवानी
नव रूपों में , पूजी जाए
घर-घर ज्योत जलाकर भक्तगण
सब श्रद्धा से, माँ को ध्याय ।
सब की इच्छा पूर्ण करती
कष्ट सभी के हरती है
सत्य धर्म की स्थापना कर
दुष्टों को दंडित करती है ।
हर रूप को, गर ध्यान से देखो
तो यह समझ पाओगे
सभी घरों में, स्त्री के रूप में
माँ के दर्शन पाओगे ।

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