रोटी की दौड़ में मौत का खतरा: थ्रेसर बन रहा काल

खेत में थ्रेसर मशीन के साथ काम करते थके हुए मजदूर, जोखिम भरा माहौल

सुनील परिहार, समसायिक लेखक, महिदपुर रोड

गेहूं की सुनहरी फसल जब खेतों में लहराती है, तो यह केवल अन्न का नहीं, बल्कि किसान और मजदूर के सपनों का भी मौसम होता है। कटाई और मड़ाई के इस व्यस्त समय में थ्रेसर मशीनें खेतों में दिन-रात चलती हैं। लेकिन इन्हीं मशीनों के साथ बढ़ते हादसे अब एक कड़वी सच्चाई बनते जा रहे हैं।

अख़बारों की खबरों में दर्ज ये हादसे केवल आंकड़े नहीं होते इनके पीछे टूटते परिवार, अनाथ होते बच्चे और बिखरते सपने होते हैं। कई बार यह हादसे खेत मालिक किसानों के साथ होते हैं, तो कई बार उन मजदूरों के साथ, जो रोज़ की मजदूरी बढ़ाने के लालच या मजबूरी में घंटों बिना आराम किए मशीन पर काम करते रहते हैं।
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सच यह है कि इन दुर्घटनाओं के पीछे केवल एक कारण नहीं, बल्कि कई परतें हैं। जल्दबाज़ी, थकान और लापरवाही इसका बड़ा कारण बनती हैं। फसल जल्दी निकालने की होड़ में मजदूर और किसान लगातार काम करते रहते हैं। शरीर थक जाता है, आंखें बोझिल हो जाती हैं, और फिर एक पल की चूक जिंदगी भर का दर्द बन जाती है। कई हादसे ऐसे भी होते हैं, जब नींद के झोंके में हाथ मशीन में चला जाता है।

इसके साथ ही सुरक्षा उपायों की अनदेखी भी एक बड़ी समस्या है। मशीन पर लगे सुरक्षा गार्ड हटाकर काम करना, ढीले कपड़े पहनना, या बिना प्रशिक्षण के मशीन चलाना ये सभी जोखिम को कई गुना बढ़ा देते हैं। गांवों में अक्सर बच्चे भी इन मशीनों के आसपास खेलते दिखाई देते हैं, जो खतरे को और बढ़ा देता है।

तकनीकी पक्ष भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। आज भी कई थ्रेसर मशीनें पुराने डिजाइन पर चल रही हैं, जिनमें आधुनिक सुरक्षा फीचर्स का अभाव है। अगर इनमें ऑटोमैटिक कट-ऑफ सिस्टम, सेंसर और मजबूत सुरक्षा कवर लगाए जाएं, तो कई जानें बचाई जा सकती हैं।

लेकिन सबसे जरूरी है सोच में बदलाव। यह समझना होगा कि कुछ अतिरिक्त पैसे या थोड़ी जल्दी के लिए अपनी जान जोखिम में डालना कोई समझदारी नहीं है। मजदूरों के लिए यह केवल कमाई का साधन नहीं, बल्कि उनके परिवार की उम्मीदों का आधार है। और किसान के लिए यह उसकी पूरी मेहनत का परिणाम।

जरूरत है जागरूकता की, प्रशिक्षण की और जिम्मेदारी की। खेतों में काम करते समय पर्याप्त आराम, सही उपकरणों का उपयोग और सुरक्षा नियमों का पालन ये छोटे-छोटे कदम बड़े हादसों को रोक सकते हैं।

क्योंकि अंत में, फसल हर साल आएगी…लेकिन खोया हुआ जीवन कभी वापस नहीं आता।

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