रिश्तों का सच

आधुनिक रिश्तों की दूरी दर्शाता उदास दंपत्ति आधुनिक रिश्तों की दूरी उदास दंपत्ति

संध्या यादव, प्रसिद्ध लेखिका, मुंबई

एक औरत और मर्द
एक-दूसरे का सबसे बड़ा
अपमान तब करते हैं,
जब हमबिस्तर तो होते हैं,
पर ख़याल में उस वक्त भी
किसी और को जीते हैं…

एक औरत और मर्द
एक-दूसरे से सबसे बड़ा
छल तब करते हैं,
जब रहते एक घर में हैं,
और जीते अलग-अलग
दुनिया में हैं…

एक औरत और मर्द
दुनिया के रंगमंच पर
सबसे बेहतर कलाकार सिद्ध होते हैं,
जब अपनी खुशियां बिना कानों-कान
खबर हुए किसी और के
घरौंदे में सेते हैं…

पर घर में पूजा-पाठ, एनीवर्सरी,
जन्म, मरण, नामकरण जैसे अवसरों पर
कछुए की खोल-सा एक बोझ
उम्र भर ढोते हैं…

असल में, ये एक जोड़े से कई-कई जोड़े
बहुत डरपोक होते हैं,
और उम्र भर अपने लिए एक कोना
सुरक्षित रखने के लिए
रस्म, समाज, संस्कार की आड़ में
अपने भय को पोषित करते हैं…

ये किसी और से नहीं, खुद से डरते हैं,
इसलिए ही भगवान के सामने भी
गांठ जोड़कर बैठे, न जाने
कितने झूठ जीते हैं…

ये जानते हैं, आधुनिकता के चरम
पर पहुंचने के बाद भी
समाज-सम्मत झूठी मर्यादा की बंदनवार
ड्योढ़ी पर सजाए, खिलखिलाते जोड़े ही
“दूधो नहाओ, पूतो फलो”
का आशीर्वाद सबसे पाते हैं…
ये रचनाएं भी पढ़ें-
दूब-धान
जल रागिनी
एक सूखा गुलाब, हजार एहसास
नवचेतना का पर्व: नवरात्रि

2 thoughts on “रिश्तों का सच

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *