
अर्पणासिंह अर्पी, प्रसिद्ध कवयित्री, रांची
कृपा मुझ पे अपनी बनाए तू रखना,
सदा गोद अपनी बिठाए तू रखना।
सभी रहजनों से बचाए तू रखना,
सदा गोद माँ में तो तेरी रहूँगी।
मैं तेरी हूँ, तेरी सदा ही रहूँगी,
मैं तेरी हूँ, तेरी सदा ही रहूँगी।
तू ममता की देवी, करुणामयी है,
विधि-पूजा की मुझको आती नहीं है।
सही बात ये मैं सच ही मैंने कही है,
शरण तेरी ही माँ, जिऊँगी-मरूँगी।
मैं तेरी हूँ, तेरी सदा ही रहूँगी,
मैं तेरी हूँ, तेरी सदा ही रहूँगी।
तेरी भक्ति में शक्ति की कामना है,
समर्पण की मेरी रही भावना है।
करूँ अर्पणा, मन से आराधना है,
तेरी भक्ति में शक्ति माँ, लेकर रहूँगी।
मैं तेरी हूँ, तेरी सदा ही रहूँगी।
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