सरस्वती वंदना
हे स्वामिनी, ज्ञानदायिनी, भक्ति-प्रकाश उर में भर दे। माँ सरस्वती से ज्ञान, विवेक, संयम और शुद्ध लेखनी का वरदान माँगती यह सुंदर वंदना मन को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर देती है।

हे स्वामिनी, ज्ञानदायिनी, भक्ति-प्रकाश उर में भर दे। माँ सरस्वती से ज्ञान, विवेक, संयम और शुद्ध लेखनी का वरदान माँगती यह सुंदर वंदना मन को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर देती है।
मेरी माँ है तू” एक अत्यंत भावपूर्ण भक्ति कविता है, जिसमें एक भक्त का अपनी माँ दुर्गा के प्रति अटूट विश्वास, प्रेम और समर्पण झलकता है। इस कविता में कवयित्री ने स्वयं को माँ की बेटी के रूप में प्रस्तुत करते हुए जीवन भर उनकी शरण में रहने की भावना व्यक्त की है।