दूरी के साये
आजकल विदेश में बसे बच्चों के माता-पिता का अंतिम जीवन कुछ ऐसा ही होता है. कई माता-पिता का पार्थिव शरीर फ्रीज़र में दिनों तक रखा रहता है, बच्चों के आने का इंतज़ार करता हुआ। कई बुज़ुर्ग अपने फ्लैट में अकेले मर जाते हैं. 3–4 दिन बाद बदबू आने पर पड़ोसियों को पता चलता है, फिर बच्चों को खबर दी जाती है।
