सिर्फ दिल में प्यार होना काफी नहीं, उसे शब्दों और व्यवहार से महसूस कराना ही रिश्तों को उम्रभर जीवंत रखता है

रुचि अग्रवाल, सिलीगुड़ी (पश्चिम बंगाल)
कहा जाता है कि सच्चा प्यार शब्दों का मोहताज नहीं होता। कई लोग मानते हैं कि यदि दिल में किसी के लिए गहरा प्रेम है, तो उसे बार-बार जताने या व्यक्त करने की आवश्यकता नहीं होती। उन्हें विश्वास होता है कि सामने वाला उनकी भावनाओं को बिना कहे ही समझ लेगा। लेकिन रिश्तों की सच्चाई इससे थोड़ी अलग है। प्यार जितना महसूस किया जाना ज़रूरी है, उतना ही उसे व्यक्त किया जाना भी आवश्यक है। क्योंकि अनकहे जज़्बात कई बार दिल में तो रहते हैं, लेकिन सामने वाले तक कभी पहुँच ही नहीं पाते।
ज़रा एक दीपक की कल्पना कीजिए। उसमें भरपूर तेल है, सुंदर बाती भी है, लेकिन यदि उसे जलाया ही न जाए, तो वह किसी अंधेरे को रोशन नहीं कर सकता। ठीक यही बात रिश्तों पर भी लागू होती है। दिल में छिपा प्रेम तब तक रिश्ते को उजाला नहीं दे सकता, जब तक वह शब्दों, व्यवहार और छोटे-छोटे प्रयासों के माध्यम से सामने वाले तक न पहुँचे।
हर इंसान अपने जीवन में यह महसूस करना चाहता है कि वह किसी के लिए मायने रखता है। वह यह सुनना चाहता है कि उसकी मौजूदगी किसी की मुस्कान की वजह है, उसकी कमी महसूस की जाती है और उसकी खुशियाँ किसी और के लिए भी महत्वपूर्ण हैं। जब ये भावनाएँ समय-समय पर शब्दों और व्यवहार के माध्यम से व्यक्त होती हैं, तब रिश्ते में विश्वास, अपनापन और आत्मीयता स्वतः बढ़ने लगती है।
प्यार जताने का अर्थ केवल महंगे उपहार देना, बड़े-बड़े सरप्राइज़ प्लान करना या किसी विशेष दिन का इंतज़ार करना नहीं है। कई बार एक छोटा-सा संदेश—“अपना ख्याल रखना”, “तुम्हारी याद आ रही है” या “तुम मेरे लिए बहुत खास हो”—किसी के पूरे दिन को मुस्कुराहट से भर देता है। बिना किसी स्वार्थ के हालचाल पूछ लेना, ध्यान से बातें सुनना, व्यस्त दिन में कुछ पल निकालकर साथ बैठना या सिर्फ एक स्नेहभरी मुस्कान देना भी प्रेम की सबसे खूबसूरत अभिव्यक्तियाँ हैं।
समस्या तब शुरू होती है, जब रिश्तों में भावनाएँ तो बनी रहती हैं, लेकिन उनकी अभिव्यक्ति कम हो जाती है। धीरे-धीरे सामने वाला यह सोचने लगता है कि शायद अब उसकी अहमियत पहले जैसी नहीं रही। वह शिकायत भले न करे, लेकिन उसके मन में एक अनकहा खालीपन जन्म लेने लगता है। ऐसे में कई रिश्ते बिना किसी बड़े विवाद के भी धीरे-धीरे भावनात्मक दूरी का शिकार हो जाते हैं।
रिश्ते केवल विश्वास, जिम्मेदारियों और साथ निभाने से ही नहीं चलते। उन्हें समय-समय पर प्रेम, सम्मान और अपनत्व की गर्माहट भी चाहिए। जैसे पौधे को हरा-भरा बनाए रखने के लिए नियमित रूप से पानी देना पड़ता है, वैसे ही रिश्तों को जीवंत बनाए रखने के लिए प्रेम की अभिव्यक्ति आवश्यक होती है। यदि प्यार को केवल दिल में ही कैद रखा जाए, तो वह धीरे-धीरे अपनी चमक खोने लगता है।
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग अक्सर यह मान लेते हैं कि सामने वाला उनकी भावनाओं को समझ ही जाएगा। लेकिन सच यह है कि रिश्तों में अनुमान नहीं, संवाद सबसे अधिक महत्वपूर्ण होता है। प्रेम को समय-समय पर शब्द दीजिए, व्यवहार दीजिए और छोटे-छोटे प्रयासों के माध्यम से उसे जीवंत बनाए रखिए। क्योंकि प्रेम केवल महसूस करने की चीज़ नहीं, बल्कि महसूस कराने की भी जिम्मेदारी है।
अंततः, किसी के जीवन में अपनी जगह बनाए रखने के लिए केवल प्रेम होना पर्याप्त नहीं है। उस प्रेम का एहसास भी कराना पड़ता है। जब दो लोग एक-दूसरे को बार-बार यह महसूस कराते हैं कि वे एक-दूसरे के लिए कितने महत्वपूर्ण हैं, तब रिश्तों में विश्वास और अपनापन और भी गहरा हो जाता है। ऐसे रिश्ते समय की हर परीक्षा में मजबूत बने रहते हैं और उनके प्रेम का दीपक हमेशा उजाला बिखेरता रहता है।
क्योंकि सच यही है. प्यार की सबसे सुंदर भाषा केवल महसूस करना नहीं, बल्कि महसूस कराना है।
