वैलेंटाइन डे जरूरी नहीं, रोज़ के छोटे पल ही बनाते हैं मजबूत रिश्ता

वैलेंटाइन डे जरूरी नहीं, प्यार रोज़ होना चाहिए

महंगे गिफ्ट और सोशल मीडिया दिखावे से हटकर आज के कपल्स प्यार को नए तरीके से जी रहे हैं. माइक्रो रोमांस यानी रोज़मर्रा के छोटे-छोटे पल अब मजबूत रिश्तों की असली पहचान बन रहे हैं. जानिए क्यों सुरक्षित और सच्चे प्यार को वैलेंटाइन डे की जरूरत नहीं होती.

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“रिश्तों की श्वास: विश्वास”

जिस प्रकार जीवन के लिए श्वास लेना आवश्यक है, उसी प्रकार रिश्तों को जीवित रखने के लिए विश्वास की आवश्यकता होती है। यदि रिश्तों में शक, झूठ और अवसाद जैसी अशुद्ध वायु भर जाए, तो उनका दम घुटने लगता है। ऐसे में जरूरी है कि हम स्वयं सकारात्मक रहें और अपने रिश्तों को विश्वास की स्वच्छ हवा प्रदान करें, क्योंकि इन्हें बचाने की ज़िम्मेदारी हमारी ही है – किसी और की नहीं।

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