“रिश्तों की श्वास: विश्वास”

जिस प्रकार हमारे जीवन जीने हेतु श्वास लेना जरूरी होता है क्योंकि, बिना इसके हमारा एक पल भी जीवित रह पाना शायद संभव ही न हो पाए और श्वास लेने के लिए उचित,स्वच्छ एवं शुद्ध वायु की आवश्यकता होती है. उसी प्रकार जीवन में रिश्तों का भी उतना ही महत्व है. रिश्तों को जीवित रखने के लिए उपरोक्त जिन सांसों की बात कही गई है वह है विश्वास. यदि रिश्तों के जीवन में यह श्वास रुपी विश्वास जरा सा भी डगमगा जाए यानि रिश्ते उचित रूप से साफ स्वच्छ ऑक्सीजन के स्थान पर शक और झूठ अवसाद, कुंठा की अशुद्ध वायु मिलने लगे तो इन रिश्तों की श्वासें घटने लगती हैं.
और यदि इन्हें समय रहते स्वच्छ वातावरण ,स्वच्छ हवा नहीं दी गई . तो इनका दम घुटने लगता है और अंततः कोई भी औषधि इन पर काम करना बंद कर देती है, और एक दिन हारकर वे दम तोड़ देते हैं. इसीलिए कोशिश कीजिए कि आपके जीवन की श्वास और रिश्तों के श्वास रुपी यह विश्वास की डोर कभी भी ना टूटे.
माना कि आज ,हवा जहरीले चल रही है, मगर मास्क लगाकर भी तो हम स्वयं को बचाते ही हैं.
ठीक उसी प्रकार यदि हम अपने रिश्ते को भी तो बचा कर रख सकते हैं. क्योंकि खुद का और अपने अमूल्य रिश्तों को बचाकर रखने की कर्तव्य किसी और का नहीं,हमारा स्वयं का ही है .दुनिया या सामने वाले को इसके लिए जिम्मेदार ठहराना या दोष देना छोड़ दे.
स्वयं सकारात्मक भाव रखें और दूसरों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बने. यही सच्चे और अनमोल रिश्तों की सार्थकता का परिमाण है.

सीमा शर्मा, प्रसिद्ध साहित्यकार
नोएडा, उत्तरप्रदेश

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *