आलिंगन की ताकत
कभी-कभी एक सच्चा आलिंगन वह सब कह देता है, जो हजारों शब्द नहीं कह पाते। गले लगाना केवल प्रेम का इज़हार नहीं, बल्कि सुरक्षा, विश्वास और भावनात्मक जुड़ाव का एहसास भी है। जानिए क्यों एक छोटा-सा आलिंगन रिश्तों में बड़ी खुशियां ला सकता है।

कभी-कभी एक सच्चा आलिंगन वह सब कह देता है, जो हजारों शब्द नहीं कह पाते। गले लगाना केवल प्रेम का इज़हार नहीं, बल्कि सुरक्षा, विश्वास और भावनात्मक जुड़ाव का एहसास भी है। जानिए क्यों एक छोटा-सा आलिंगन रिश्तों में बड़ी खुशियां ला सकता है।
रिश्तों में हर ‘हम्म’ नाराजगी या दूरी का संकेत नहीं होता। कई बार इसके पीछे मानसिक थकान, व्यक्तित्व का स्वभाव या संवाद का अलग तरीका छिपा होता है। जानिए कैसे समझें अपने पार्टनर की खामोशी को।
“भीड़ में अकेला” एक संवेदनशील हिंदी कहानी है, जो युवाओं के भीतर चल रहे मानसिक संघर्ष, सामाजिक दबाव और संवाद की कमी को बेहद मार्मिक ढंग से प्रस्तुत करती है। यह कहानी बताती है कि समय पर समझ, प्रेम और संवाद किसी की जिंदगी बदल सकते हैं।
“यह हिंसा अचानक नहीं होती, बल्कि वर्षों से जमा हो रही पीड़ा और असंतोष का विस्फोट होती है…
एक अस्वस्थ रिश्ते में जीते हुए हर दिन मरने से बेहतर है, उसे अलविदा कहना।”
आज के डिजिटल दौर में दोस्ती का मतलब सिर्फ आमने-सामने मिलना नहीं रह गया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे Instagram, Discord और WhatsApp ने रिश्तों की परिभाषा ही बदल दी है। खासकर COVID-19 lockdown के दौरान, लाखों लोगों ने ऑनलाइन दोस्त बनाए. ऐसे दोस्त जो कभी मिले नहीं, लेकिन दिल के बहुत करीब आ गए।
बेंगलुरु। 25 जनवरी को बेंगलुरु की सड़कों पर एक अनोखा और दिल को छू लेने वाला दृश्य देखने को मिलेगा। हैप्पी एयर (Happpy AiR) और बेंगलुरु ट्रैफिक पुलिस के सहयोग से पूरे शहर में “हैप्पी एयर परेड” निकाली जा रही है। यह परेड किसी एक रूट तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि शहर के व्यस्ततम सार्वजनिक…
सामाजिक विमर्श की अहमियत और आत्महत्या रोकने के बहुआयामी प्रयासों की ज़रूरत पर प्रकाश डालता है। आंकड़े, मानसिक और आर्थिक कारण, और परिवार की भूमिका पर विचार करते हुए यह जागरूकता बढ़ाने का संदेश देता है।
शासकीय कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय, उज्जैन एवं शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास, महिला कार्य, उज्जैन के संयुक्त तत्वावधान में महिला विमर्श कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का विषय “महिला स्वास्थ्य: सर्वोच्च प्राथमिकता” रहा।
शारीरिक बीमारियों का इलाज तो हम कर लेते हैं लेकिन वह बीमारियां जो दिमाग के अंदर ही अंदर पनपतीं रहती हैं, किसी को दिखाई नहीं देती है, सही समय पर उनको पहचान कर, स्वीकार करना और इलाज ना किया जाए तो उनका रूप किस कदर बिगड़ेगा …..
विवेक की मानसिक स्थिति दिन प्रतिदिन बिगड़ती जा रही थी । मां को लेकर वह असुरक्षित महसूस करता था । अपनी बात ना मां को ना किसी और को समझा पाया ।
मां उसकी इस बीमारी को समझ तो रही थी लेकिन इससे पहले कि वह इलाज ढूंढती …..