
मौसमी चंद्रा, पटना
तुम्हारे न लौटने की संभावना
अब धीरे-धीरे मेरे जीवन का
एक निर्विवाद सत्य बन चुकी है!
फिर भी एक बात,
जो समय के अधिकार-क्षेत्र से बाहर है।
तुम्हारे लिए मेरे भीतर
जो प्रेम कभी जन्मा था,
तुम्हारी अनुपस्थिति
उसे अपने साथ नहीं ले जा सकी!
वह आज भी मेरे पास सुरक्षित है,
तुम्हारे लौटने की प्रतीक्षा किए बिना!
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माँ
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अपनी ही आवाज़
श्रद्धा का विराट कारवां,. तप की यात्रा
यादें तुम्हारी शामिल रहेंगी
तुम्हारा प्रेम
अग्निपरीक्षा हुई है मेरी
सुख-दुख के मौसम आते हैं…
प्रकृति का कहर
