
कंचनमाला “अमर”(उर्मी) नई दिल्ली
यादें तुम्हारी शामिल रहेंगी
मेरे लिए वो क़ातिल रहेंगी
आज़ाद हूँ मैं, मन की गिरह से
यादें तेरी यूँ, हाइल रहेंगी
कितने भी पत्थर, हम पर उछालो
बस नेकियाँ ही, नाज़िल रहेंगी
रौंदा जहाँ ने, जिनको हमेशा
रूहें सदा वो, क़ामिल रहेंगी
नेकी को रखिए, दिल में हमेशा
सबकी दुआएँ, हासिल रहेंगी
हर बात कहिए, कहना सही है
नस्लें नहीं तो, गाफ़िल रहेंगी
झूठी ज़मीं पर, जो भी हों बातें
सच की ही बातें, काबि़ल रहेंगी
नग़्मे सुनाए, तुमने जो मुझको
दिल में धुनें वो, शामिल रहेंगी
बातें अधूरी, रह जाती हैं गर,
लफ़्ज़ों में बातें, दाख़िल रहेंगी
