जब चिड़िया चुग गई खेत !

तेज़ रफ़्तार ज़िंदगी में आगे बढ़ते हुए विनोद ने सफलता तो पा ली, लेकिन रिश्तों को समय देना भूल गया। करवाचौथ के दिन एक गजरा उसे एहसास दिला देता है कि प्यार बड़ी चीज़ों में नहीं, बल्कि उन छोटे पलों में छिपा होता है जिन्हें वह हमेशा टालता रहा। जब समझ आया, तब बहुत देर हो चुकी थी।

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रिश्तों की अहमियत समझो, डस्टबिन में मत डालो

सब्ज़ियों की मंडी से शुरू हुई यह स्मृतियों की यात्रा रिश्तों तक पहुँचती है, जहाँ लेखक अतीत और वर्तमान की तुलना करते हुए बताता है कि जैसे सब्ज़ियाँ बासी होकर फेंक दी जाती हैं, वैसे ही आज रिश्ते भी संवेदना के अभाव में डस्टबिन तक पहुँच जाते हैं।

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“रिश्तों की श्वास: विश्वास”

जिस प्रकार जीवन के लिए श्वास लेना आवश्यक है, उसी प्रकार रिश्तों को जीवित रखने के लिए विश्वास की आवश्यकता होती है। यदि रिश्तों में शक, झूठ और अवसाद जैसी अशुद्ध वायु भर जाए, तो उनका दम घुटने लगता है। ऐसे में जरूरी है कि हम स्वयं सकारात्मक रहें और अपने रिश्तों को विश्वास की स्वच्छ हवा प्रदान करें, क्योंकि इन्हें बचाने की ज़िम्मेदारी हमारी ही है – किसी और की नहीं।

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