Live Wire News literary portal with Gulmohar and Rajnigandha flowers

प्रश्नचिह्न

कभी-कभी निस्वार्थ प्रेम पर भी प्रश्नचिह्न लगते हैं। आँखों में चमक तो होती है—कभी हीरे की, कभी तारे की—पर दोनों की चमक में अंतर होता है, दिखावे का। दोनों दृष्टिगत होते हुए भी दृष्टि की गहराई में फर्क ममता का होता है। तारा ऊँचाई पर है, हीरा गहराई में; दोनों ही दुर्लभ हैं, पर दिल की दूरी उन्हें अलग करती है। किसी को विरासत में सूर्य की रोशनी और चाँद का आशीर्वाद मिलता है, तो कोई अंधेरी अमावस के कुओं से अंधेरा पीता है। सच्ची परख गुमनाम परतों में छिपी होती है, कवि की कल्पनाओं में नहीं—उसे पहचानने के लिए लंबे हाथ नहीं, गहराई चाहिए। शायद इसी कारण, कभी-कभी ममता पर भी प्रश्नचिह्न लग जाता है।

Read More

“रिश्तों की श्वास: विश्वास”

जिस प्रकार जीवन के लिए श्वास लेना आवश्यक है, उसी प्रकार रिश्तों को जीवित रखने के लिए विश्वास की आवश्यकता होती है। यदि रिश्तों में शक, झूठ और अवसाद जैसी अशुद्ध वायु भर जाए, तो उनका दम घुटने लगता है। ऐसे में जरूरी है कि हम स्वयं सकारात्मक रहें और अपने रिश्तों को विश्वास की स्वच्छ हवा प्रदान करें, क्योंकि इन्हें बचाने की ज़िम्मेदारी हमारी ही है – किसी और की नहीं।

Read More