सावन सोमवार और रिश्तों की तलाश

सावन सोमवार पर हास्य व्यंग्य लेख, शिव भक्ति और जीवन का संदेश

संध्या यादव, मुंबई

सावन का सोमवार शुरू हो गया है। बस एक ठो रिक्वेस्ट करनी थी जनानियों—अच्छा बर पाने के लिए उपवास करना मत शुरू कर देना। इतना सारा एप्लिकेशन पेंडिंग पड़ा है कि नया अनुरोध देखा ही नहीं जा रहा। ऊपर से अच्छा मरद बनाने वाला साँचा भी सालों पहले एक्सपायर हो चुका है। नया माल का ऑर्डर चीन को दिया है, पर ऊ कमबख्त भी सिर पीट रहा है कि अच्छा मनसेधू बनाने का कच्चा माल लाएँ तो कहाँ से लाएँ।

जब प्रार्थना पूरी होने की गारंटी ही नहीं, तो काहे सोलह सोमवार बरबाद करना?

अपने आसपास की जनानियों को देख लो—उन्ने सोलह सोमवार तपस्या करके कौन-सा तीर मार लिया! तो हमारी बात मानो, सावन में अपनी काया और मन दोनों को उपवास के चक्कर में मत डालो। पकौड़े तलो, अदरक वाली चाय बनाओ, खिड़की पर बैठो और सावन का मजा लो। सुंदर, स्मार्ट, गुड-लुकिंग मरद मिले न मिले, दो टके की कमाई में लाखों का सावन बरबाद मत करो।

भक्ति करनी है तो खूब मन लगाकर, बिना किसी लालच के सच्चे मन से करो। भोले बाबा की प्लानिंग पर भरोसा रखो—वो किसी का बुरा नहीं करते।

और खुद को इतना काबिल बनाओ कि तुम्हें पाने के लिए कोई सिर्फ सावन ही नहीं, हर सोमवार व्रत रखे। मिल जाओ तो भगवान को धन्यवाद देने के लिए उम्र भर व्रत रखे।

इतनी अच्छी बन जाओ कि अगले जनम में तुम्हें पाने के लिए पड़ोसी व्रत रखे और सात जन्मों तक साथ पाने के लिए तुम्हारा साथी तुम्हारी जगह करवाचौथ भी भूखा रहे। तब भोलेनाथ भी कन्फ्यूज होकर खुद तुम्हारे पास आकर पूछें—

“बता बंदी, अब तोहार रजा का है?”

तो बरत-उपवास के चक्कर में मत पड़ो। अर्जी वाला डिपार्टमेंट बंद है। तुम बस अच्छे करम करो, भोलेनाथ खुश होकर “तथास्तु” खुद कह देंगे।

और हाँ, सावन का जी भरकर मजा लो—पकौड़ी तलो, चाय बनाओ, कोई अच्छा-सा रोमांटिक गीत गाओ। पेट भरा हो तो सावन भी कुछ ज्यादा ही सुहाना लगता है।

आप पूछेंगे, हमें कैसे पता?

अरे, हमें सब पता है एकदमै बकलोल थोड़े न हैं।
सकल से दिखते हैं, अकल से नहीं हैं।

अनुभव है हमारा, सब भुगत चुके हैं।

हमारा तो हाल ये है

“न खुदा ही मिला, न विसाले-यार,
न इधर के रहे, न उधर के।”

तो खा-पीकर भक्ति कीजिए, सावन का आनंद लीजिए—ताकि जिंदगी में बाद में ये अफसोस न रहे कि व्रत करते-करते सावन ही निकल गया…

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