पूजा सामग्री की दुकान में आपस में चर्चा करती दो कौड़ियाँ और पास में हँसता हुआ कॉकरोच, जो सामाजिक और मीडिया व्यंग्य का प्रतीक है।

उलझन

जब कौड़ियाँ चर्चा का विषय बन जाएँ, पत्रकार और शिक्षक आमने-सामने खड़े हो जाएँ और कॉकरोच हँसने लगें, तब जन्म लेता है एक ऐसा व्यंग्य जो समाज की विडंबनाओं को आईना दिखाता है।

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पश्चिम बंगाल की राजनीतिक पृष्ठभूमि में मुख्यमंत्री की कुर्सी के पास दृढ़ मुद्रा में खड़ी एक प्रभावशाली महिला नेता, चारों ओर मीडिया कैमरे, राजनीतिक झंडे और चुनावी माहौल दिखाई देता हुआ व्यंग्यात्मक दृश्य।

खूब लड़ी मर्दानी, झांसा वाली रानी..

बंगाल की राजनीति पर आधारित यह व्यंग्य सत्ता, हार-जीत, इस्तीफे और राजनीतिक नाटकों की विडंबना को हास्य और तंज के माध्यम से बेहद रोचक अंदाज़ में प्रस्तुत करता है।

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विश्व पुस्तक मेले में उज्जैन की गूंज: ‘व्यंग्य के रंग’ में शामिल डॉ. हरीशकुमार सिंह

राष्ट्रीय स्तर पर प्रकाशित व्यंग्य संकलन ‘व्यंग्य के रंग’ में उज्जैन के वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. हरीशकुमार सिंह की रचना का चयन शहर के लिए गौरव का विषय बना।

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