हमाम के नंगे
जाति और धर्म से ऊपर उठने की बातें करने वाला आदर्शवाद जब रोजमर्रा के व्यवहार की छोटी-सी परीक्षा में बदल जाता है, तब कथनी और करनी का अंतर उजागर हो जाता है।

जाति और धर्म से ऊपर उठने की बातें करने वाला आदर्शवाद जब रोजमर्रा के व्यवहार की छोटी-सी परीक्षा में बदल जाता है, तब कथनी और करनी का अंतर उजागर हो जाता है।
जब मेहनत से उगाई गई ऑर्गेनिक सब्ज़ियों का स्वाद अलग होता है, तो क्या मौलिक रचना और चोरी की पंक्ति में भी कोई फ़र्क़ नहीं होना चाहिए? ‘ऑर्गेनिक कहानी’ इसी सवाल पर तीखा व्यंग्य है.
मंत्री के दस मिनट के दौरे के लिए पंडाल, कारपेट, भजन, जय-जयकार और मिठाई तक. इस व्यंग्य में एक बच्चे का मासूम सवाल लोकतंत्र में जनता की भूमिका और राजनीतिक चेतना की पूरी कहानी सामने रख देता है।
सावन सोमवार आते ही व्रत, पूजा और मनचाहे वर की कामनाओं का दौर शुरू हो जाता है। लेकिन क्या सिर्फ उपवास से जिंदगी की खुशियां मिल जाती हैं? एक हल्के-फुल्के अंदाज में यह व्यंग्य बताता है कि खुद को बेहतर बनाना, अच्छे कर्म करना और जीवन का आनंद लेना भी उतना ही जरूरी है।
सावन का मजा लीजिए, भक्ति को सच्चे मन से निभाइए और खुद को इतना काबिल बनाइए कि खुशियां खुद आपके दरवाजे तक आएं।
बंगाल की राजनीति पर आधारित यह व्यंग्य सत्ता, हार-जीत, इस्तीफे और राजनीतिक नाटकों की विडंबना को हास्य और तंज के माध्यम से बेहद रोचक अंदाज़ में प्रस्तुत करता है।
राष्ट्रीय स्तर पर प्रकाशित व्यंग्य संकलन ‘व्यंग्य के रंग’ में उज्जैन के वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. हरीशकुमार सिंह की रचना का चयन शहर के लिए गौरव का विषय बना।