
रश्मि मृदुलिका, प्रसिद्ध लेखिका, देहरादून (उत्तराखंड)
इस दौर में, जब हर ओर भटके हुए युवाओं के बारे में पढ़ने और सुनने को मिलता है, तब किसी युवा को बेझिझक अपने सपनों की ओर ईमानदारी से बढ़ते हुए देखना एक सुखद अनुभूति देता है. यह उम्मीद भी जिंदा रखता है कि अभी बहुत कुछ अच्छा बाकी है. आज एक वैवाहिक समारोह में मैंने लगभग 20-21 वर्ष के एक युवक को देखा. उसके चेहरे पर तेज था, निर्मल मुस्कान थी. वह स्मार्ट और आकर्षक व्यक्तित्व का धनी था. हाथों में कॉफी की ट्रे लिए वह हर मेहमान से विनम्रता से पूछ रहा था. थोड़ी देर बाद वह सूप के काउंटर पर दिखाई दिया, फिर पानी के काउंटर पर. तभी शायद कैटरिंग का मालिक उसे आइसक्रीम के स्टॉल पर ले गया. वह उसके कंधे पर विश्वास और स्नेह से हाथ रखकर कुछ समझा रहा था. युवक मुस्कुराकर सहमति में सिर हिला रहा था, मानो उसे उसी पर पूरा भरोसा हो.
मुझसे रहा नहीं गया. आखिर लेखक मन जो ठहरा. मैं उसके पास गई और पूछा, बेटा क्या तुम कोई कोर्स कर रहे हो. यहां कैसे काम कर रहे हो. उसने हल्की मुस्कान के साथ विनम्रता से झुककर कहा, हां, मैं होटल मैनेजमेंट कर रहा हूं और यहां पार्ट टाइम काम करता हूं.
वह फिर अपने काम में लग गया. न कोई संकोच, न कोई झिझक. वहीं मुझे कुछ ऐसे युवा भी दिखे जो फैशन और दिखावे में खोए हुए थे. हाथों में मोबाइल लिए इधर-उधर घूम रहे थे. माता-पिता की कमाई पर अपनी इच्छाएं पूरी करने वाले उन युवाओं के बीच वह कर्मठ युवक कोहिनूर की तरह चमक रहा था. जब युवाओं के बढ़ते अपराध, मोबाइल गेम पर समय और धन की बर्बादी, सिगरेट और गलत आदतों से बिगड़ता स्वास्थ्य चिंता बढ़ाता है, तब ऐसे युवा मन में शांति और विश्वास भर देते हैं.
मैंने उसके साथ कोई तस्वीर नहीं ली, हालांकि मन में इच्छा थी. पर उसका ध्यान भंग करने का साहस नहीं हुआ. जिस तल्लीनता से वह काम कर रहा था, उसे देखकर लगा मानो परिश्रम ने ही उसका रूप ले लिया हो. वह पूरे समारोह का मुख्य आकर्षण बन गया था. उसकी छवि वहां उपस्थित हर संवेदनशील व्यक्ति के मन में अवश्य अंकित हो गई होगी.

बहुत अच्छा। ऐसे युवा निश्चित ही बेहतरीन भविष्य की नींव रखने में सफल हो सकेंगे।