
नमिता सिन्हा, बेंगलुरु
गर्मी की छुट्टियां शुरू हो चुकी थीं। पांचवीं कक्षा का आरव बहुत उतावला हो रहा था, क्योंकि इस बार वह अपनी नानी के गांव जा रहा था। शहर की भागदौड़ से दूर, गांव की मिट्टी की खुशबू, आम के बाग, नहर में तैरना — ये सब उसे बहुत पसंद थे।
जैसे ही आरव गांव पहुंचा, उसके मुंह से निकला, “वाह! यहां की तो हवा भी मीठी लगती है।”
नानी ने मुस्कुराते हुए कहा, “तो चलो, तुम्हें एक खास जगह दिखाती हूँ।”
नानी आरव को लेकर आम के बाग में आईं और बोलीं, “जब मैं छोटी थी, तो गर्मियों में हम यहां खेलते थे और पेड़ के नीचे खजाना छिपाते थे।”
आरव की आंखें चमक उठीं, “खजाना! कैसा खजाना?”
नानी ने मुस्कुराते हुए कहा,
“असली खजाना नहीं, दोस्ती और यादों का खजाना।”
लेकिन आरव को लगा, शायद सचमुच कोई खजाना होगा। अगले दिन वह अपने गांव के दोस्तों के साथ उस जगह की खुदाई करने लगा। कई जगह खुदाई करने के बाद, एक पेड़ के नीचे उसे टिन का एक डब्बा मिला।टिन के डब्बे में कुछ पुराने सिक्के, रंग-बिरंगे कंचे, एक चिट्ठी और एक तस्वीर मिली। चिट्ठी में लिखा था:”जो भी ये खजाना पाए, समझ लेना कि दोस्ती सबसे बड़ा खजाना है। इसे संभाल कर रखना और खुशियां बांटना।”आरव और उसके दोस्तों ने फैसला किया कि वे भी अपनी गांव की यादों का एक नया खजाना बनाएंगे और उसे छिपा देंगे, ताकि कोई बच्चा सालों बाद आए और उसे पाए।गर्मी की छुट्टियां अब आरव और उसके दोस्तों के लिए एक नई याद बन गई थीं — नानी के घर की वह गर्मी, प्यार और ढेर सारी मस्ती की।
सीख: गर्मी की छुट्टियां सिर्फ मजे के लिए ही नहीं होतीं, बल्कि यादें और दोस्ती का खजाना बनाने का समय भी होती हैं।
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आपने मुझे मेरा बचपन याद दिला दिया 😍 हृदयस्पर्शी प्रस्तुति 👌🙏🥰💕
संपादक आदरणीय श्री सुरेश परिहार जी
Luve Wire News अद्भुत 👌 लाजवाब शानदार है अशेष शुभकामनाएं 🙏🌷