प्यार में मर्यादा

दूर होकर भी दिल के पास

सुरेश परिहार, पुणे

प्यार यह सिर्फ एक एहसास नहीं, बल्कि किसी के भीतर धीरे-धीरे बस जाने वाली वह ख़ामोशी है, जो बिना शोर किए जीवन बदल देती है. कभी किसी की एक मुस्कान दिल को छू जाती है, कभी कैसे हो? जैसे साधारण शब्द भी पूरे दिन का सुकून बन जाते हैं. और कभी कोई अजनबी, जो हजारों किलोमीटर दूर बैठा होता है, अचानक दिल के इतना करीब आ जाता है कि उसकी आदत-सी हो जाती है.
आज सोशल मीडिया ने दूरियों को बहुत छोटा कर दिया है. फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सऐप और अनगिनत प्लेटफॉर्म लोगों को जोड़ रहे हैं. पहले जिन भावनाओं को व्यक्त करने में बरसों लग जाते थे, अब वे कुछ दिनों की बातचीत में ही महसूस होने लगती हैं. दो लोग, जिनकी सोच मिलती हो, जिनकी पसंद एक जैसी हो, जिनकी बातें एक-दूसरे को सुकून देती हों वे उम्र, शहर और परिस्थितियों की सीमाएँ पार करके भी एक-दूसरे से जुड़ जाते हैं.लेकिन क्या सिर्फ किसी की तरफ आकर्षित हो जाना ही प्यार है?
शायद नहीं. सच्चा प्यार वह होता है, जहाँ दिल को सुकून मिले, मन को सम्मान मिले और आत्मा को अपनापन महसूस हो. प्यार वह है, जहाँ कोई आपको बदलने की कोशिश नहीं करता, बल्कि आपकी कमियों सहित आपको स्वीकार करता है. जहाँ बातचीत में मिठास हो, अधिकार नहीं. जहाँ परवाह हो, लेकिन कैद नहीं. और यही वह जगह है, जहाँ मर्यादा प्यार को खूबसूरत बनाती है.
मर्यादा का अर्थ सिर्फ सीमाएँ तय करना नहीं है. मर्यादा का अर्थ है सामने वाले की भावनाओं की इज़्ज़त करना. उसकी निजी दुनिया को समझना. उसके आत्मसम्मान को ठेस न पहुँचाना. क्योंकि प्यार कभी किसी को छोटा महसूस नहीं कराता. सच्चा प्रेम तो वह होता है, जो इंसान को भीतर से मजबूत बना दे. आज रिश्ते बहुत जल्दी बनते हैं. देर रात तक बातें होना, हर छोटी बात शेयर करना, किसी के ऑनलाइन आने का इंतज़ार करना यह सब धीरे-धीरे दिल को जोड़ देता है. लेकिन कई बार इसी जल्दबाज़ी में रिश्तों की गंभीरता खो जाती है. लोग प्यार में अधिकार तो चाहते हैं, लेकिन धैर्य नहीं रखते. अपनापन चाहते हैं, लेकिन सम्मान भूल जाते हैं. जबकि प्रेम का सबसे सुंदर रूप वही है, जिसमें स्वतंत्रता भी हो और विश्वास भी. कुछ रिश्ते नाम के मोहताज नहीं होते. वे बस महसूस किए जाते हैं. उनमें हर वक्त आई लव यू कहना ज़रूरी नहीं होता.

कई बार सिर्फ यह पूछ लेना कि खाना खाया? या आज बहुत थके हुए लग रहे हो भी प्रेम का सबसे गहरा स्पर्श बन जाता है. क्योंकि प्रेम शब्दों से नहीं, एहसासों से जीवित रहता है. कई लोग जीवन की भीड़ में बहुत अकेले होते हैं. बाहर से हँसते हुए, भीतर से टूटे हुए. ऐसे में अगर कोई ऐसा मिल जाए जो बिना जज किए आपकी बातें सुन ले, आपकी ख़ामोशी समझ ले, आपकी उदासी पढ़ ले तो दिल उसके पास ठहरना चाहता है.

शायद यही प्यार की सबसे मासूम शुरुआत होती है. सच्चा प्यार डर नहीं देता, सुकून देता है. वह बंधन नहीं बनाता, सहारा बनता है. वह आपको खोने से नहीं डराता, बल्कि आपको खुद से मिलाता है. इसलिए प्यार में मर्यादा बहुत ज़रूरी है. क्योंकि मर्यादा ही रिश्तों को लंबे समय तक सुंदर बनाए रखती है. बिना सम्मान के प्रेम केवल आकर्षण बनकर रह जाता है, लेकिन सम्मान और संवेदनशीलता से भरा प्रेम जीवन की सबसे खूबसूरत ताकत बन जाता है. आख़िर में प्यार वही सच्चा है.जो आत्मा को शांति दे, दिल को अपनापन दे, और जीवन को थोड़ा और खूबसूरत बना दे.

17 thoughts on “प्यार में मर्यादा

  1. प्यार में मर्यादा बहुत जरूरी है अच्छी सीख है 👌👌

    1. प्रेम शब्द बहुत छोटा है, लेकिन हो तो अनन्त है।
      पर संसार में व्यापार ही व्याप्त अनन्त है।।

    1. कितनी सुंदर परिभाषा है प्रेम की❣️ इन कुछ बातों को अगर सही से समझ लिया जाए तो प्रेम जटिल बन ही नहीं सकता👌

  2. ह्रदय स्पर्श करता हुआ लेख भावनाओं का अद्भुत उल्लेख

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