सैनिक का अंतर्मन
यह कविता एक सैनिक के अंतर्मन की उन गहराइयों को उजागर करती है, जहाँ कर्तव्य और भावनाएँ एक साथ सांस लेती हैं। वह अपने परिवारपत्नी, बहन, पिता और माँसे दूर होते हुए भी उनसे गहराई से जुड़ा रहता है, लेकिन देश के प्रति अपने वचन को सर्वोपरि रखता है। उसके भीतर का प्रेम त्याग में बदल जाता है, और उसकी हर विदाई एक अनकही पीड़ा के साथ-साथ गर्व का संदेश भी छोड़ जाती है। यह रचना बताती है कि एक सैनिक केवल सरहदों की रक्षा नहीं करता, बल्कि अपने दिल के सबसे करीब रिश्तों को पीछे छोड़कर पूरे देश को अपना परिवार मान लेता है।
